
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिक है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूँ और मेरी पत्नी अक्षरा के साथ मेरी शादी को अब तीन साल हो चुके हैं। अक्षरा मेरी उम्र की है, पच्चीस साल की, और उसका शरीर देखकर हर कोई पागल हो जाता है। उसकी गोरी चमड़ी, 36 इंच की मोटी छातियाँ, पतली कमर और 38 इंच की गोल-गोल गाँड़ किसी को भी दीवाना बना देती है। हम दोनों एक छोटे से दो कमरे के फ्लैट में रहते हैं। जॉइंट फैमिली नहीं है, इसलिए रात को हमारी चुदाई में कोई रोक-टोक नहीं होती।
शुरू से ही अक्षरा बहुत हॉट और गंदी बातें करने वाली लड़की रही है। शादी के पहले दिन से ही वो मेरे लंड को हाथ में लेकर कहती थी, “नितिक, आज रात तू मेरी चूत फाड़ देना।” आज भी वही हालत है। कल रात की बात है। ऑफिस से लौटते ही बारिश शुरू हो गई थी। अक्षरा ने दरवाजा खोला तो वो सिर्फ एक पतली नाइटि में थी। नाइटि इतनी पतली थी कि उसके निप्पल साफ दिख रहे थे। मैं अंदर आया और उसे पीछे से पकड़ लिया।
“अरे नितिक, इतनी जल्दी क्या है?” वो मुस्कुराते हुए बोली। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “तेरी चूत आज बहुत तरस रही है ना? देखता हूँ कितनी गीली है।” मैंने उसकी नाइटि ऊपर उठाई और सीधे उसकी चूत पर हाथ मार दिया। अक्षरा की चूत पहले से ही गीली थी। मेरी उँगलियाँ उसके चूत के रस में डूब गईं। “हाँ नितिक, चोद मुझे आज रात भर।” वो सिसकारते हुए बोली।
हम सीधे बेडरूम में गए। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी नाइटि उतार दी। अक्षरा पूरी नंगी हो गई। उसकी मोटी छातियाँ उछल रही थीं। मैंने एक चूची को मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। अक्षरा चीखने लगी, “आह्ह्ह नितिक, और जोर से चूस, मेरे निप्पल को काट ले!” मैंने उसके दूसरे स्तन को हाथ से दबाया और निप्पल को उँगलियों से मरोड़ा।
फिर मैं नीचे गया। अक्षरा की टाँगें फैलाईं और उसकी चूत को चाटने लगा। उसकी चूत बिल्कुल साफ और गुलाबी थी, लेकिन रस से भरपूर। मैंने जीभ से उसके चूत के होठों को चाटा और फिर क्लिटोरिस को चूस लिया। अक्षरा पागल हो गई, “नितिक, तेरी जीभ से मेरी चूत जल रही है! और अंदर डाल, उँगली डाल!” मैंने दो उँगलियाँ उसकी चूत में घुसा दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। अक्षरा का शरीर काँप रहा था।
“अब लंड दे नितिक, मुझे अपना मोटा लंड चूत में चाहिए!” वो चीखी। मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था, सात इंच लंबा और मोटा। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और मुँह में डाल लिया। वो जोर-जोर से चूसने लगी, “उम्म्म्म, कितना गर्म है तेरा लंड।” उसकी जीभ मेरे लंड के नीचे घूम रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसका मुँह चोदना शुरू कर दिया। अक्षरा का मुँह लार से भर गया।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे पीठ के बल लिटाया और उसके दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। मेरा लंड सीधा उसकी चूत के पास था। “बोल, चोदूँ?” मैंने पूछा। “हाँ नितिक, अब और मत सताओ, मेरी चूत फाड़ डाल!” अक्षरा चिल्लाई। मैंने एक जोरदार झटका मारा। मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। अक्षरा की आँखें बंद हो गईं, “आह्ह्ह्ह, माँ, कितना मोटा है!”
मैं तेजी से चोदने लगा। हर झटके में मेरा लंड पूरी तरह अंदर जाता और बाहर आता। अक्षरा की चूत से चप-चप की आवाजें आ रही थीं। “ले, ले मेरा लंड! तेरी चूत आज फट जाएगी!” मैं गंदी बातें बोलता रहा। अक्षरा भी जवाब दे रही थी, “हाँ, चोद मुझे, अपनी बीवी की चूत को फाड़ डाल! और जोर से!”
हम पोजीशन बदलते रहे। पहले डॉगी स्टाइल में। अक्षरा घुटनों के बल खड़ी हुई और मैं पीछे से उसकी गाँड़ पकड़कर चोदने लगा। उसकी गाँड़ के दो टुकड़े लहरा रहे थे। मैंने उसकी गाँड़ पर थप्पड़ मारे, “कितनी मोटी गाँड़ है तेरी!” फिर वो ऊपर चढ़ गई और मेरे लंड पर बैठकर चोदने लगी। उसकी छातियाँ मेरे मुँह के सामने झूल रही थीं। मैं उन्हें चूसता रहा जबकि वो अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ रही थी।
रस निकलने लगा। अक्षरा का चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था। “नितिक, मैं झड़ने वाली हूँ!” वो चीखी। मैंने भी तेजी बढ़ा दी। अक्षरा का शरीर ऐंठ गया और उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया। वो जोर से चीखते हुए झड़ गई। “आह्ह्ह्ह्ह!”
लेकिन मैं अभी नहीं झड़ा था। मैंने उसे फिर से लिटाया और इस बार उसकी गाँड़ में लंड डालने की कोशिश की। “नहीं नितिक, गाँड़ में दर्द होगा!” वो बोली। “बस थोड़ा सा, तेरी गाँड़ भी तो ले ले,” मैंने कहा। थोड़ा तेल लगाकर मैंने लंड का सिरा उसकी गाँड़ में घुसाया। अक्षरा दर्द से चीखी लेकिन धीरे-धीरे आदत हो गई। मैं धीरे-धीरे गाँड़ चोदने लगा।
रात भर हम चोदते रहे। तीन बार अक्षरा झड़ी और आखिर में मैंने उसकी चूत में ही अपना गरम माल छोड़ दिया। अक्षरा की चूत से मेरा वीर्य बह रहा था। हम दोनों पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे से लिपट गए।
अगली सुबह भी अक्षरा ने कहा, “नितिक, आज शाम को फिर वही करना।” यही है हमारी जिंदगी, नितिक और अक्षरा की चुदाई की कहानी। हम दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं और हमारी चूत-लंड की भूख कभी खत्म नहीं होती।
(यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। हर रात नई पोजीशन, नई गंदी बातें, और नई चुदाई। अक्षरा की चूत हमेशा मेरे लंड के लिए तैयार रहती है।)