
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अहम है। मैं दिल्ली में रहता हूं, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी 28 साल है और नौकरी करता हूं एक प्राइवेट कंपनी में। ये कहानी मेरी और गोपी की है। गोपी मेरी पड़ोस वाली लड़की है, उम्र 24 साल, सुंदर सी, गोल-गोल चेहरा, बड़ी-बड़ी आंखें और शरीर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। वो अक्सर हमारे फ्लैट के पास आती थी क्योंकि उसकी सहेली मेरी बहन की दोस्त थी। शुरू में सिर्फ हल्की-फुल्की बातें होती थीं, लेकिन फिर धीरे-धीरे रोमांस बढ़ा और वो रोमांस इतना गंदा और गर्म हो गया कि हम दोनों पागल हो गए।
गोपी का फिगर देखकर कोई भी कंट्रोल नहीं कर पाता। उसके स्तन पूरे 36 इंच के, गोल और भारी, नीचे की तरफ थोड़े झुके हुए जैसे आम के फल। उसकी कमर पतली, 28 इंच, और गांड 38 इंच की, इतनी मोटी कि जब वो चलती तो हिलती रहती। उसकी चूत हमेशा गीली रहती, जैसे कोई आम का रस बह रहा हो। एक दिन बारिश में वो हमारे फ्लैट आई। बारिश जोरों से हो रही थी, उसके कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे। सफेद सलवार सूट, अंदर ब्रा का निशान साफ दिख रहा था। मैं अकेला था घर में। उसने कहा, “अहम, बारिश में फंस गई, थोड़ा रुक जाऊं?” मैंने हां कर दी।
उसने गीले कपड़े बदलने के लिए मांगा। मैंने अपनी बहन की टी-शर्ट और शॉर्ट्स दे दी। वो बाथरूम में गई और जब निकली तो टी-शर्ट उसके स्तनों पर चिपक गई थी, निप्पल साफ उभरे हुए। शॉर्ट्स उसकी जांघों पर चढ़ गए थे। मैंने देखा और मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया, 8 इंच का मोटा लंड, नसें उभरी हुई। गोपी ने भी देख लिया। वो मुस्कुराई और बोली, “अहम, तुम्हारा लंड खड़ा हो गया? मेरी वजह से?” मैंने हिम्मत करके कहा, “हां गोपी, तेरी चूत देखने का मन कर रहा है।”
वो पास आई, मेरे कान में फुसफुसाई, “तो देख ले, मेरी चूत कितनी गीली है तेरे लिए।” मैंने उसे उठाकर बेड पर लिटा दिया। उसके स्तनों को हाथ से दबाया, टी-शर्ट ऊपर खींची। दो बड़े स्तन बाहर निकल आए, निप्पल गुलाबी और सख्त। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया, चूसा, काटा। गोपी चीखी, “अहम, और जोर से चूस, मेरे स्तन दुख रहे हैं तेरे मुंह में।” मैं दूसरे स्तन पर हाथ मारा, निचोड़ने लगा। उसकी सांसें तेज हो गईं।
फिर मैं नीचे गया। शॉर्ट्स उतारा। उसकी चूत सामने थी, बाल कटे हुए, होंठ फूले हुए, रस बह रहा था। मैंने उंगली डाली, “गोपी, तेरी चूत कितनी टाइट है।” वो बोली, “अहम, अपनी उंगली और डाल, रगड़ मेरी चूत को।” मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं, अंदर-बाहर करने लगा। रस निकल रहा था, मेरे हाथ गीले हो गए। गोपी मचल रही थी, “चोद मुझे अहम, अपना मोटा लंड मेरी चूत में डाल।”
मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो देखकर चौंक गई, “कितना बड़ा है तेरा लंड, मेरी चूत फट जाएगी।” मैंने उसकी चूत पर लंड रगड़ा, सिर को भिगोया उसके रस में। फिर धीरे से धक्का मारा। लंड का सिरा अंदर गया। गोपी चिल्लाई, “आह्ह्ह, धीरे अहम, दर्द हो रहा है।” मैंने और जोर लगाया, आधा लंड अंदर। उसकी चूत कस गई मेरे लंड पर। मैंने बाहर निकाला, फिर जोर से धक्का। पूरा लंड अंदर घुस गया। गोपी की आंखें बंद हो गईं, “फाड़ दी मेरी चूत, तेरे मोटे लंड ने।”
मैंने रफ्तार पकड़ी। चोदने लगा, “थप थप” की आवाज आ रही थी। गोपी बोल रही थी, “और जोर से चोद, मेरी चूत का रस निकाल।” मैंने उसके स्तन पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारे। पसीना निकल रहा था दोनों के शरीर से। 10 मिनट बाद गोपी झड़ गई, उसकी चूत से रस फूटा, मेरे लंड पर बह गया। मैंने भी रुककर कहा, “अब मेरी बारी, तेरी गांड मारूं?”
गोपी ने पलटकर गांड ऊपर उठाई। उसकी गांड गोल और सफेद, छेद छोटा। मैंने थूक लगाया, उंगली डाली। फिर लंड का सिरा गांड पर रखा। धीरे से दबाया। गांड ने लंड को निगल लिया। गोपी चीखी, “अहम, गांड फट रही है, लेकिन और डाल।” मैंने पूरा लंड गांड में घुसा दिया। फिर चोदने लगा, “थप थप”। गोपी बोल रही थी, “मेरी गांड मार, अपना रस अंदर डाल।”
हम दोनों झड़ गए। मेरा रस उसकी गांड में भर गया। उसके बाद हम लेट गए, गले मिलकर। लेकिन ये शुरूआत थी। अगले दिन फिर मिले। इस बार किचन में। गोपी ने कहा, “अहम, मुझे फिर चोद।” मैंने उसे काउंटर पर बिठाया, लंड उसकी चूत में डाला। खड़े-खड़े चोदा। उसके स्तन हिल रहे थे।
फिर हम बाथरूम में गए। पानी के नीचे नंगी होकर नहाए। मैंने उसकी चूत चाटी, जीभ अंदर डाली। गोपी का रस पी लिया। वो बोली, “तेरी जीभ मेरी चूत में कितनी अच्छी लगती है।” मैंने उसे दीवार से टिकाया, पीछे से चोदा। लंड उसकी चूत में घुसता रहा, पानी की बूंदें हमारे शरीर पर।
एक हफ्ते बाद हम होटल गए। कमरे में बंद होकर पूरी रात चोदा। पहले 69 पोजीशन में, मैं उसकी चूत चाटता, वो मेरा लंड चूसती। उसका मुंह गर्म, जीभ लंड पर फेरती। फिर मिशनरी, फिर डॉगी स्टाइल। हर पोजीशन में गोपी चिल्लाती, “अहम, और गहरा, मेरी चूत फाड़।” मैंने उसकी गांड में भी रस डाला। सुबह तक हम थक गए, लेकिन संतुष्ट।
गोपी अब मेरी नियमित पार्टनर बन गई। हर हफ्ते मिलते, नई-नई जगहों पर चोदते। ऑफिस के बाद फ्लैट में, बारिश में छत पर, यहां तक कि कार में भी। उसकी चूत हमेशा मेरे लंड के लिए तैयार रहती। उसके स्तनों को निचोड़ना, चूत को चाटना, गांड मारना – ये सब हमारी रोजमर्रा की बात हो गई।
एक बार हमने दोस्तों के साथ पिकनिक पर जाना, लेकिन रात में अलग होकर जंगल में चोदा। पेड़ के नीचे, घास पर लेटकर। गोपी की गांड पर मिट्टी लग गई, लेकिन हम रुके नहीं। लंड उसकी चूत में घुसता रहा, रस निकलता रहा।
ये कहानी अभी भी जारी है। गोपी और मेरा रोमांस गंदा, गर्म और लंबा चल रहा है। हर बार नया मजा, नई पोजीशन, नया गंदा बोल। अगर तुम्हें और डिटेल चाहिए तो बताना, लेकिन इतना ही काफी है सोचने के लिए कि कैसे एक साधारण पड़ोसन गोपी ने मेरे लंड को अपना बना लिया।