नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नक्ष है। मैं दिल्ली के एक मिडिल क्लास इलाके में रहता हूं, जहां जॉइंट फैमिली का माहौल अभी भी है। मेरी उम्र 28 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूं। आज की कहानी मेरे सबसे करीबी दोस्त नाटिक और उसकी बीवी अक्षरा के बारे में है। अक्षरा की उम्र 26 साल है, गोरी चमड़ी, बड़े-बड़े स्तन, मोटी गोल गांड और कमर पर हल्की चर्बी जो उसे और भी सेक्सी बनाती है। नाटिक मेरा बचपन का दोस्त है, हम दोनों अक्सर उसके फ्लैट पर मिलते थे।
वो दिन रविवार था। बारिश हो रही थी और मैं नाटिक के फ्लैट पर गया था क्योंकि हमने मिलकर मैच देखने का प्लान बनाया था। नाटिक का फ्लैट दो कमरों का था, एक हॉल और एक बेडरूम। जब मैं पहुंचा तो दरवाजा खुला था। मैं सीधे अंदर चला गया। हॉल में कोई नहीं था। मैंने सोचा शायद नाटिक बाहर गया हो। लेकिन तभी बेडरूम से हल्की-हल्की आवाजें आने लगीं।
“आह्ह्ह… नाटिक, धीरे से… तेरी उंगली मेरी चूत में इतनी जोर से मत डाल…” अक्षरा की आवाज थी, सांसें तेज, moans निकल रहे थे। मैं ठिठक गया। मैंने सोचा शायद गलती से आ गया, लेकिन मेरे पैर आगे बढ़ गए। बेडरूम का दरवाजा आधा खुला था। मैंने झांककर देखा।
नाटिक और अक्षरा बेड पर थे। अक्षरा पूरी तरह नंगी लेटी थी। उसके बड़े स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे, निप्पल खड़े और गुलाबी। नाटिक उसके ऊपर था, उसकी उंगलियां अक्षरा की चूत में घुसा रहा था। अक्षरा की चूत गीली थी, रस बह रहा था। नाटिक बोला, “तेरी चूत कितनी टाइट है रे, आज तो मैं इसे फाड़ दूंगा।” अक्षरा हंसकर बोली, “हां चोद मुझे, अपनी लंड मेरी चूत में घुसा दे।”
मैं खड़ा देखता रहा। मेरा लंड खड़ा हो गया। अक्षरा की गांड मोटी थी, उसके जांघों के बीच चूत फूल रही थी। नाटिक ने अपनी लंड निकाली, मोटी और लंबी, नसें उभरी हुई। उसने अक्षरा की टांगें फैलाईं और लंड चूत के मुंह पर रखा। “ले, मेरी रांड, आज तेरी चूत चाट-चाट के चोदूंगा।” अक्षरा चीखी, “हां नाटिक, जोर से चोद, मेरी चूत फाड़ दे।”
नाटिक ने एक झटके में लंड अंदर घुसा दिया। अक्षरा की चूत से “प्लच” की आवाज आई, रस बाहर निकला। नाटिक जोर-जोर से धक्के मारने लगा। “आह्ह्ह… तेरी चूत गर्म है, कितना रस बह रहा है।” अक्षरा के स्तन हिल रहे थे, वो नाटिक की पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। “और जोर से, मेरी गांड भी मारना आज।”
मैं दरवाजे के पास खड़ा था, लंड हाथ में लिए। तभी अक्षरा की नजर मुझ पर पड़ी। उसकी आंखें चौड़ी हुईं, लेकिन वो रुकी नहीं। नाटिक को कुछ पता नहीं चला। अक्षरा मुस्कुराई और बोली, “नक्ष…

तू आ गया?” नाटिक चौंका, लेकिन अक्षरा ने उसे रोका। “रुक मत, चोदते रह। नक्ष को भी देखने दे।”
नाटिक ने मुड़कर देखा, लेकिन वो भी उत्तेजित हो गया। “आ जा नक्ष, देख ले अपनी भाभी को चुदते हुए।” अक्षरा ने मुझे बुलाया। “नक्ष, आ, मेरी चूत देख, कितनी गीली है।” मैं कमरे में घुसा। अक्षरा ने हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को छुआ। “वाह, तेरा लंड भी खड़ा हो गया।”
नाटिक ने अक्षरा को घुमाया, अब वो कुत्ते वाली पोज में थी। गांड ऊपर, चूत पीछे की तरफ। नाटिक ने गांड पर थप्पड़ मारा, “ले, मेरी चूत वाली रांड।” लंड फिर चूत में घुसाया। अक्षरा चीखी, “आह्ह्ह… दोनों भाई मिलकर चोदो मुझे।” मैं सामने बैठ गया, अक्षरा ने मेरे लंड को मुंह में लिया। उसकी जीभ लंड पर घूम रही थी, “चूसती हूं तेरा लंड, नक्ष।”
नाटिक पीछे से जोर-जोर से चोद रहा था। “तेरी चूत का रस मेरे लंड पर लग रहा है।” अक्षरा का मुंह भर गया मेरे लंड से, वो गले तक ले रही थी। लार बह रही थी। नाटिक ने अक्षरा की गांड फैलाई और उंगली गांड में डाली। “आज तेरी गांड भी मारूंगा।”
अक्षरा ने लंड मुंह से निकाला, “हां, मेरी गांड चोदो दोनों।” नाटिक ने लंड चूत से निकाला, रस टपक रहा था। उसने लंड गांड के छेद पर रखा और धीरे से दबाया। अक्षरा चीखी, “आह्ह्ह… दर्द हो रहा, लेकिन अच्छा लग रहा।” लंड आधा अंदर गया। नाटिक जोर लगाया, पूरा लंड गांड में। अक्षरा का शरीर कांप रहा था।
मैंने आगे बढ़कर अक्षरा के स्तन दबाए। निप्पल चूसा। अक्षरा बोली, “नक्ष, मेरी चूत चाट।” मैं नीचे लेट गया, उसकी चूत मुंह के पास। रस का स्वाद लिया, जीभ चूत के अंदर डाली। अक्षरा चीख रही थी, “दोनों मिलकर चोदो, मैं मर जाऊंगी।”
नाटिक गांड मार रहा था, मैं चूत चाट रहा था। अक्षरा का पहला झड़ना आया, चूत से रस फूटा, मेरे मुंह में। “आह्ह्ह… मैं झड़ गई।” नाटिक ने भी रफ्तार बढ़ाई, “ले, मेरी गांड में मेरा माल।” वो झड़ गया, गरम माल गांड में भर दिया।
फिर नाटिक ने मुझे अक्षरा के ऊपर चढ़ने दिया। मैंने लंड चूत में डाला। अक्षरा की चूत अभी भी टाइट थी। “चोद मुझे नक्ष, तेरे दोस्त की बीवी को।” मैं जोर-जोर से धक्के मारने लगा। अक्षरा के स्तन हाथ में लिए, दबाए। नाटिक बैठा देख रहा था, “भाभी को अच्छा चोद।”
हम तीनों घंटों तक चोदते रहे। अक्षरा की चूत, गांड, मुंह सब इस्तेमाल हुआ। रस, पसीना, moans से पूरा कमरा भर गया। आखिर में अक्षरा थककर लेट गई, शरीर लाल निशानों से भरा। नाटिक बोला, “अब ये हमारा सीक्रेट है।” अक्षरा मुस्कुराई, “नक्ष, फिर आना।”
ये घटना के बाद हम तीनों कई बार मिले, लेकिन वो पहली बार सबसे यादगार थी। अक्षरा की चूत का रस, गांड की टाइटनेस, सब अभी भी याद आता है।