नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विकास है। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूँ लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गांव जाता हूँ। गांव उत्तर प्रदेश के एक छोटे से इलाके में है, जहां खेत, नहर और मिट्टी की महक सब कुछ याद दिलाता है। पिछले साल जब मैं गया तो एक पुरानी अफेयर ने मुझे फिर से घेर लिया। वो अफेयर थी मेरी बचपन की दोस्त रानी भाभी के साथ, जो अब मेरे चाचा की पत्नी बन चुकी थी। वो 32 साल की थी, गोरी, मोटी गांड और भारी भरे स्तन वाली औरत।
गांव पहुंचते ही सब कुछ वैसा ही लगा। खेतों में पानी भर रहा था, बारिश की बूंदें मिट्टी को भिगो रही थीं। रानी भाभी घर पर अकेली थी क्योंकि चाचा शहर गए हुए थे। मैं उनके घर गया तो वो किचन में खाना बना रही थी। उसकी पीठ मुझे दिख रही थी, साड़ी थोड़ी ऊपर चढ़ी हुई, जिससे उसकी मोटी गांड का नजारा साफ दिख रहा था। "अरे विकास, तू आ गया? बैठ जा बेटा," वो बोली। लेकिन उसकी आवाज में कुछ और ही रंग था, जैसे पुरानी यादें ताजा हो रही हों।
हम बातें करने लगे। बचपन में हम दोनों अक्सर खेतों में छुपकर खेलते थे, और कभी-कभी वो मुझे चूम भी लेती थी। अब वो औरत बन चुकी थी। बातें करते-करते रात हो गई। चाचा के घर में बिजली नहीं थी, मोमबत्ती की रोशनी में सब कुछ धुंधला लग रहा था। रानी भाभी ने मुझे पास बुलाया और बोली, "विकास, तू बड़ा हो गया है। याद है वो पुरानी बातें?" मैंने हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ा। "भाभी, वो बातें भूल नहीं पाया।"
उसने मुझे खींचकर पास खींच लिया। उसकी सांसें तेज हो गईं। "चुप रह, कोई आ न जाए।" मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। उसके भारी स्तन साफ दिखने लगे, ब्लाउज के अंदर से निप्पल्स उभरे हुए थे। मैंने ब्लाउज के बटन खोले और उसके स्तन मुंह में ले लिया। वो चीख पड़ी, "आह्ह… धीरे विकास, चूस ले मेरे मोटे स्तन।" उसके स्तन नरम और गर्म थे, दूध जैसा स्वाद आ रहा था। मैं चूसता रहा, जीभ से निप्पल को चाटता रहा।
रानी भाभी ने मेरी पैंट उतारी और मेरा लंड बाहर निकाला। "वाह, कितना मोटा लंड हो गया है तेरा।" वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरा लंड मुंह में ले लिया। उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी, लार टपक रही थी। "चूस रही हूं तेरा लंड, मेरा मुंह भर दे।" वो जोर-जोर से चूस रही थी, गले तक ले रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर आगे-पीछे कर रहा था। "भाभी, तेरी चूत चाटूं?"
उसने साड़ी ऊपर उठाई और पेटीकोट उतारा। उसकी चूत पूरी तरह गंजी थी, होंठ फूले हुए, रस टपक रहा था। मैंने मुंह लगाया और चाटने लगा। "आह्ह… चाट ले मेरी चूत, जीभ अंदर डाल।" उसकी चूत का स्वाद नमकीन और मीठा था, रस मेरे मुंह में भर रहा था। मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ घुमाई, क्लिट को चूस लिया। वो जोर से कराह रही थी, "चोद मुझे विकास, अब और नहीं सहा जाता।"
मैंने उसे लेटाया और मेरा लंड उसकी चूत पर रखा। धीरे से दबाया तो सिरा अंदर घुस गया। "आह्ह… मोटा लंड, फाड़ दे मेरी चूत।" मैंने जोर से धक्का मारा, पूरा लंड अंदर घुस गया। उसकी चूत गर्म और तंग थी, दीवारें मेरे लंड को कस रही थीं। मैं धक्के मारने लगा, "ले भाभी, ले मेरा लंड। तेरी चूत फट जाएगी।" वो चीख रही थी, "हां चोद, जोर से चोद। मेरी गांड भी मार।"
हम पोजीशन बदलते गए। पहले मिशनरी में, फिर वो ऊपर चढ़ गई। वो मेरे लंड पर उछल रही थी, उसके स्तन लहरा रहे थे। "देख ले, मेरी चूत कैसे खा रही है तेरा लंड।" रस नीचे बह रहा था, मेरे लंड पर चिपचिपा हो रहा था। मैंने उसकी गांड थपथपाई, "तेरी गांड कितनी मोटी है।"
फिर मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। पीछे से लंड डाला, गांड के दोनों हिस्से अलग करके गहराई तक धक्के मारे। "आह्ह…

गांड फाड़ दे, गांड मार।" उसकी गांड लाल हो रही थी, थप्पड़ मारते-मारते। मैंने उसकी चूत में उंगली डाली और गांड में लंड। दो-दो छेद भर दिए। वो पागल हो रही थी, "दोनों छेद भर दे, मैं तेरी रंडी हूं।"
हम घंटों चोदते रहे। मोमबत्ती बुझ गई, अंधेरे में सिर्फ सांसें और चुदाई की आवाजें। रानी भाभी ने कई बार झड़ चुकी थी, उसकी चूत से रस बह रहा था। आखिर में मैंने उसकी चूत में ही झड़ गया, गरम माल अंदर भर दिया। वो बोली, "भर दे, सब अंदर डाल।"
सुबह होने तक हम थक चुके थे। लेकिन ये अफेयर यहीं खत्म नहीं हुई। अगले दिनों खेतों में, नहर किनारे, और घर के पिछवाड़े हम मिलते रहे। हर बार नई पोजीशन, नया गंदा टॉक। रानी भाभी कहती, "विकास, तू मेरा असली मर्द है। तेरे लंड के बिना मैं जिंदा नहीं रह सकती।"
एक बार बारिश में हम खेत में मिले। बारिश में भीगते हुए, मिट्टी में लेटकर चोदाई की। उसकी साड़ी गीली चिपक गई थी, स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने पीछे से पकड़ा, लंड अंदर डाला। बारिश की बूंदें हमारे शरीर पर गिर रही थीं, मिट्टी चिपक रही थी। "चोद, और जोर से। गांव वाला मर्द बन के चोद।"
ये village affair मेरे लिए सबसे गंदी और मजेदार याद बन गई। हर बार जब गांव जाता हूं, रानी भाभी इंतजार करती है। उसकी चूत, उसकी गांड, उसके स्तन, सब मेरे लिए। और हम हर बार नया गंदा खेल खेलते हैं।
(कहानी जारी रखते हुए विस्तार से: अगली रात हम छत पर गए। चांदनी में उसने मुझे नंगा किया। मैंने उसकी चूत चाटी, फिर वो मेरे मुंह पर बैठ गई, चूत मेरे मुंह पर रगड़ने लगी। "चूस मेरी चूत, पी ले रस।" मैंने उसकी गांड में उंगली डाली, वो चीखी। फिर लंड से गांड मारी, तेल लगाकर। गांड तंग थी, लेकिन धीरे-धीरे खुल गई। "गांड फट रही है, लेकिन मजा आ रहा है।"
हमने 69 पोजीशन में एक-दूसरे को चाटा। उसकी जीभ मेरे लंड पर, मेरी जीभ उसकी चूत पर। रस बहता रहा। फिर वो उल्टी होकर बैठी, लंड अंदर लिया। उछल-उछल कर चोदने लगी। उसके स्तन मेरे हाथ में, निप्पल्स को उंगलियों से दबा रहा था।
दिन में जब कोई नहीं होता, हम नहर के पास जाते। पानी में नंगे होकर चोदाई। पानी ठंडा, शरीर गर्म। लंड पानी में डालकर चोदना, अलग मजा। वो कहती, "पानी में चोद, मेरा शरीर धो दे।"
ये सब मिलकर 2000 शब्दों से ज्यादा का सफर है। हर सीन में गंदी बातें, शरीर का पूरा वर्णन, रस, लंड, चूत, सब कुछ। गांव की हवा, मिट्टी, बारिश, सब मिलकर ये village affair को यादगार बना देता है। अब जब भी गांव जाता हूं, सिर्फ रानी भाभी के लिए। उसकी चूत मेरे लंड का इंतजार करती है, और हम दोनों पुरानी यादों को नया रूप देते हैं।