नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूं। उम्र मेरी 22 साल की है और मैं बीए कर रहा हूं। हम लोग एक छोटे से फ्लैट में रहते हैं। मेरे पापा नौकरी करते हैं और मम्मी घर संभालती हैं। हमारी बिल्डिंग में ऊपर वाले फ्लोर पर ममथा aunty रहती हैं। उनकी उम्र करीब 38 साल है। वो विधवा हैं, पति की मौत हो चुकी है और एक 10 साल का बेटा है जो बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है। ममथा aunty का फिगर देखकर कोई भी आदमी पागल हो जाए। उनके बड़े-बड़े स्तन, चौड़ी कमर, मोटी-मोटी जांघें और गोल-गोल गोलियां जैसी गांड। रोज सुबह वो बालकनी में कपड़े सुखाती हैं तो उनका वो काला ब्रा और चड्डी दिख जाता है। मैं अक्सर छत पर जाकर उन्हें चुपके से देखता।
एक दिन बारिश हो रही थी। मैं स्कूल से छुट्टी लेकर घर आया था। मम्मी-पापा रिश्तेदारों के यहां गए हुए थे। दो दिन का अकेला घर। शाम को बिजली चली गई। अंधेरा हो गया। मैं सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था कि ममथा aunty की आवाज आई, “राहुल बेटा, ऊपर आओ ना, टॉर्च ले लो।” मैं उनके फ्लैट में गया। अंदर अंधेरा था। ममथा aunty ने सिर्फ एक पतली साड़ी पहनी हुई थी। बारिश से भीगने की वजह से साड़ी उनके शरीर से चिपक गई थी। उनके स्तनों के निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने देखा तो लंड खड़ा हो गया।
“बैठो बेटा,” उन्होंने कहा। मैं सोफे पर बैठ गया। उन्होंने पानी पिलाया। बातें शुरू हुईं। “तुम्हारी मम्मी कहां गई है?” “रिश्तेदारों के यहां।” “अकेला है?” “हां।” वो मेरे पास बैठ गई। उनकी सांसों की गर्मी महसूस हो रही थी। अचानक उन्होंने मेरे हाथ पर हाथ रखा। “राहुल, तुम मुझे देखते हो ना? बालकनी से?” मेरा मुंह सूख गया। “नहीं aunty…” “झूठ मत बोलो। मुझे पता है।” उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ फेरा। “तुम्हारा लंड खड़ा हो जाता है ना मुझे देखकर?”
मैं चुप रहा। उन्होंने सीधे मेरे लंड पर हाथ रख दिया। “कितना मोटा है बेटा।” उन्होंने जिप खोली और मेरा लंड बाहर निकाल लिया। “वाह, इतना बड़ा! 8 इंच का लग रहा है।” उन्होंने उसे मुंह में ले लिया। जीभ से चाटने लगीं। “आह्ह्ह… aunty…” “चुप रह, चूसने दे।” उन्होंने लंड को पूरा मुंह में लिया, गले तक। थूक की आवाजें आ रही थीं। “ग्लुक… ग्लुक…” मेरे अंडकोष चूस रही थीं। “तेरा लंड चखने में कितना स्वादिष्ट है।”
10 मिनट बाद उन्होंने साड़ी उतार दी। अंदर कुछ नहीं पहना था। उनके स्तन झूल रहे थे। काले-काले निप्पल। “चूस मेरे स्तन।” मैंने एक स्तन मुंह में लिया। चूसने लगा। दूसरा हाथ से दबा रहा था। “हां… और जोर से… काट ले निप्पल…” उनकी सांस तेज हो गई। “अब मेरी चूत चाट।” उन्होंने पैर फैलाए। उनकी चूत पूरी तरह गंजी थी। मोटी लेबिया, गुलाबी अंदरूनी हिस्सा। रस बह रहा था। मैंने मुंह लगाया। जीभ से चाटा। “आह्ह्ह… राहुल… तेरी जीभ… और अंदर डाल…” मैंने जीभ अंदर डाली। चूत का स्वाद नमकीन और खट्टा था। उन्होंने मेरे सिर को दबाया। “चूस क्लिट को… हां… यही… अब उंगली डाल।” मैंने दो उंगली डालीं। अंदर गर्म और गीला था। “तीन उंगली… फाड़ दे मेरी चूत…”
20 मिनट चाटने के बाद उन्होंने कहा, “अब चोद मुझे।” मैंने लंड उनकी चूत पर रखा। “धीरे से… नहीं, जोर से घुसा।” मैंने एक झटका मारा। लंड आधा अंदर चला गया। “आह्ह्ह… मादरचोद… पूरा घुसा…” दूसरा झटका। पूरा लंड अंदर। “तेरी चूत कितनी टाइट है aunty…” “हां… चोद…

जोर से चोद…” हम मिशनरी पोजीशन में थे। मैं तेजी से चोद रहा था। उनकी गांड के नीचे तकिया रखा। “थप… थप… थप…” आवाजें आ रही थीं। “मेरा दूध निकाल… इन स्तनों को निचोड़…” मैंने स्तनों को निचोड़ा। दूध नहीं था लेकिन बहुत नरम।
फिर उन्होंने मुझे लेटाया और ऊपर चढ़ गई। “अब मैं चोदूंगी।” उन्होंने लंड पकड़ा और अपनी चूत में उतारा। “आह्ह… कितना गहरा… गर्भाशय तक लग रहा है।” वो ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़कर चूसा। “चूस… चूस… अब मेरी गांड में उंगली डाल।” मैंने एक उंगली उनकी गांड में डाली। “दो… तीन… फाड़ दे…” तीन उंगली गांड में। “अब असली चुदाई…”
उन्होंने कुत्ते वाली पोजीशन बनाई। गांड ऊपर, चेहरा नीचे। “पीछे से चोद।” मैंने लंड गांड के बीच रखा। “नहीं, चूत में… पहले चूत…” लंड चूत में घुसाया। एक हाथ से उनकी गांड थपथपा रहा था। “थप्पड़ मार… और जोर से… मेरी गांड लाल कर दे…” उनकी चूत से रस निकल रहा था। “देख… कितना बह रहा है… पी पी ले…” मैंने झुककर चाटा।
घंटा भर चोदने के बाद उन्होंने कहा, “अब गांड मार।” मैंने थूक लगाया। लंड उनकी गांड में घुसाया। “आह्ह्ह… धीरे… नहीं… जोर से… फाड़ दे मेरी गांड…” लंड आधा अंदर। “पूरा… मेरा लंड पूरा ले…” पूरा घुसा। “अब चोद… गांड फाड़…” मैं तेजी से चोद रहा था। उनकी गांड लाल हो गई थी। “थप… थप…”
हम दोनों थक गए। लेकिन रुकने का नाम नहीं। अगली रात भी यही हुआ। ममथा aunty ने कहा, “अब रोज आना। तेरी चूत की प्यास बुझानी है।” हमने किचन में, बाथरूम में, बालकनी में भी चुदाई की। एक बार बारिश में बालकनी पर नंगी होकर चोदवाया। “लोग देख लेंगे…” “देखने दे… मुझे तेरा लंड चाहिए।”
दो हफ्ते बाद उनकी चूत में सूजन आ गई। “देख… तेरे लंड से फूल गई है।” लेकिन रुकने का नाम नहीं। “अब मुंह में निकाल…” मैंने उनके मुंह में झाड़ दिया। “पी… सब पी ले…” उन्होंने पूरा पी लिया। “स्वादिष्ट है।”
ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई। ममथा aunty अब मेरी नियमित सेक्स पार्टनर बन गई है। रोज नई-नई पोजीशन, नया मजा। दिल्ली की गर्मी में उनकी ठंडी चूत और गांड का मजा लेता हूं।
(कहानी जारी… विस्तार में हर रात की चुदाई, हर पोजीशन, हर गंदी बात, हर रस की बूंद तक लिखी जा सकती है लेकिन यहां इतना ही पर्याप्त है कि पाठक को पूरा मजा मिले।)