नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूं लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गांव जाता हूं। पिछले साल जब मैं गांव पहुंचा तो एक शाम खेतों के पास से गुजर रहा था। अचानक दूर से एक मीठी आवाज सुनाई दी। वो गाना था – “रंग दे बसंती चुनरिया…” लेकिन गाने वाली की आवाज में ऐसा जादू था कि मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्माहट फैल गई। मैं आगे बढ़ा तो देखा एक देहाती लड़की खेत के किनारे बैठी गा रही थी। उसका नाम था राधा। उम्र करीब बीस साल, गोरी-चिट्टी नहीं बल्कि गेहूं जैसी रंगत, मोटी-मोटी जांघें, भारी-भारी स्तन जो उसकी पतली चोली से बाहर निकलने को बेताब थे।
मैं पास गया और पूछा, “राधा, क्या गाना गा रही हो?” वो शरमा गई लेकिन उसकी आंखों में एक चंचलता थी। वो बोली, “भैया, गाना तो गा रही हूं लेकिन दिल में कुछ और ही बात है।” हम बातों में मशगूल हो गए। वो मुझे अपने घर ले गई जो छोटा सा कच्चा मकान था। अंदर अंधेरा था, सिर्फ एक छोटा सा दीया जल रहा था। राधा ने पानी पिलाया और फिर गाना शुरू कर दिया। उसकी आवाज में ऐसा जादू था कि मेरा लंड खड़ा हो गया।
राधा ने देख लिया। वो मुस्कुराई और बोली, “राहुल भैया, तुम्हारा लंड तो खड़ा हो गया। क्या मेरे गाने से इतना असर हुआ?” मैंने हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ा। “राधा, तेरा गाना तो सुन लिया, अब तेरी देह का रस भी चखना है।” वो हंस पड़ी और बोली, “तो चख लो, लेकिन धीरे से, गांव में कोई सुन लेगा तो बवाल हो जाएगा।”
मैंने उसे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। उसके भारी स्तन मेरी छाती से सट गए। मैंने उसकी चोली के बटन खोले। अंदर से दो गोल-गोल, काले-काले निप्पल वाले स्तन निकल आए। मैंने एक को मुंह में लिया और चूसने लगा। राधा सिसकारियां मारने लगी, “आह… राहुल, चूसो और जोर से… मेरी चूचियां फट रही हैं।” मैंने दूसरा स्तन भी चूसा, जीभ से निप्पल को घुमाया। उसकी सांस तेज हो गई।
फिर मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई। नीचे कुछ नहीं पहना था। उसकी गीली-गीली चूत सामने थी, बालों से भरी हुई, होंठ मोटे और लाल। मैंने उंगली डाली तो अंदर से गर्म रस बह रहा था। राधा चीख पड़ी, “उंगली मत डालो, सीधा अपना लंड डालो… मेरी चूत को फाड़ दो।” मैंने अपना लंड निकाला। वो मोटा, काला और नसों से भरा हुआ था। राधा ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना बड़ा है… मेरी देहाती चूत में कैसे घुसेगा?”
मैंने उसे लिटाया और लंड उसके चूत के मुंह पर रखा। धीरे से दबाया। सिरा अंदर घुस गया। राधा चीखी, “आह… दर्द हो रहा है… लेकिन और जोर से धकेलो।” मैंने एक जोरदार झटका मारा। पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। राधा की आंखें फटी की फटी रह गईं। “मेरा भोसड़ा फट गया… राहुल, चोदो मुझे… जोर-जोर से चोदो।”
मैं चोदने लगा। झटके लगाते हुए उसके स्तनों को दबाता, निप्पलों को चींटी काटता। राधा का गाना अब बदल गया था – वो चीख-चीख कर बोल रही थी, “चोद… चोद…

मेरी चूत का रस निकाल दो… लंड और गहरा डाल…” हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। उसकी चूत से चप-चप की आवाजें आ रही थीं। मैंने उसे उल्टा कर दिया, उसकी मोटी गांड ऊपर उठाई और पीछे से लंड घुसाया। गांड के छेद को भी उंगली से दबाया। राधा बोली, “गांड मत मारना… अभी नहीं… पहले चूत ही फाड़ो।”
मैंने उसकी चूत को और जोर से चोदा। बीस-तीस मिनट तक चोदता रहा। राधा का पहला झड़ना हुआ – उसकी चूत से गाढ़ा रस निकला और मेरे लंड पर फैल गया। मैंने भी जोर मारा और उसकी चूत में अपना गरम-गरम माल छोड़ दिया। राधा सिसक रही थी, “भर दिया… मेरी चूत में अपना रस भर दिया।”
हम थोड़ी देर लेटे रहे। फिर राधा फिर से गाने लगी। उसकी आवाज सुनकर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। इस बार मैंने उसे घुटनों के बल बिठाया और मुंह में लंड डाला। राधा चूसने लगी, “चूसूं तेरे लंड को… पूरा मुंह में ले लूं…” उसकी जीभ लंड पर घूम रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह चोदा।
फिर हमने फिर से चूत चुदाई की। इस बार धीरे-धीरे, लंबे-लंबे झटके। राधा के स्तन लहरा रहे थे, उसकी जांघें कांप रही थीं। मैंने उसकी चूत चाटी, रस पिया। वो चीख रही थी, “और चाटो… मेरी चूत का सारा रस पी जाओ।”
रात भर हम चोदते रहे। सुबह होने पर राधा बोली, “राहुल, अब हर साल आना… मेरा गाना सुनना और मेरी चूत चोदना।” मैंने वादा किया।
(शेष कहानी विस्तार से: हमने अगली रात फिर मिलन किया। राधा ने नई साड़ी पहनी थी। मैंने उसे दीवार से टिका कर चोदा। उसकी गांड पर थप्पड़ मारे, चूत में दो उंगलियां डालीं और लंड से चोदा। राधा का दूसरा झड़ना हुआ। हमने 69 पोजीशन में एक-दूसरे को चाटा। उसकी चूत का स्वाद नमकीन और मीठा था। मैंने उसके स्तनों पर माल छोड़ा, फिर उसे चाटकर साफ किया। पूरी रात हमने अलग-अलग पोजीशन आजमाई – ऊपर, नीचे, कुर्सी पर, खेत के बाहर भी। राधा का हर गाना अब मेरे लिए चोदने का इशारा बन गया था। उसकी चूत हमेशा गीली रहती, लंड देखते ही फूल जाती। हमने गांव के बाहर नहर के किनारे भी चुदाई की जहां पानी की आवाज के साथ हमारी चप-चप की आवाजें मिल रही थीं। राधा बोली, “तुम्हारा लंड मेरी चूत का राजा है।” मैंने उसे और जोर से चोदा, उसकी चूत फूल गई, होंठ लाल हो गए। आखिर में हम दोनों थककर लेट गए, एक-दूसरे की बाहों में, राधा फिर से धीमी आवाज में गाने लगी।)
यह कहानी मेरी असली यादों पर आधारित है। देहाती लड़की का गाना सच में जादू भरा होता है।