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What Happened to Village Life Love and Babies – Gaon Ki Garmi Bhari Chudai Kahani — विस्तार से

What Happened to Village Life Love and Babies – Gaon Ki Garmi Bhari Chudai Kahani — विस्तार से

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली में एक छोटी सी जॉब करता था लेकिन पिछले साल जब मेरे पापा का देहांत हुआ तो मुझे उनके गांव जाना पड़ा। गांव का नाम था बड़ौदा, उत्तर प्रदेश का एक छोटा सा ठिकाना जहां बिजली आती नहीं, इंटरनेट तो सपना था। शुरू में तो बहुत बुरा लगा लेकिन फिर गांव की जिंदगी ने मुझे अपने में खींच लिया। खासकर जब मैंने मीरा को देखा। मीरा मेरे पड़ोस के घर की बीस साल की लड़की थी, गोरी चमड़ी, भरे हुए स्तन, चौड़ी कमर और गांड इतनी मोटी कि देखकर लंड अपने आप खड़ा हो जाता। उसकी आंखों में एक भोली सी शरारत थी। हम दोनों बचपन से जानते थे लेकिन अब वो औरत बन चुकी थी।

पहले कुछ दिन हम बस बातें करते। खेतों में घूमते, नहर के किनारे बैठते। लेकिन धीरे धीरे बातें गंदी होने लगीं। एक बार बारिश में हम दोनों भीग गए। मीरा की साड़ी उसके शरीर से चिपक गई थी। उसके स्तन साफ दिख रहे थे, निप्पल्स खड़े हो गए थे। मैंने कहा, "मीरा, तू कितनी sexy लग रही है आज।" वो शरमा गई लेकिन हंस पड़ी। उसी रात उसने मुझे अपने घर बुलाया। उसके माता पिता खेत में थे।

जैसे ही मैं अंदर गया, मीरा ने दरवाजा बंद किया। उसने सीधे मेरे पास आकर कहा, "विक्रम, मुझे बहुत दिनों से तेरा लंड चूसने का मन कर रहा है।" मैं चौंक गया लेकिन लंड पहले से ही तन चुका था। उसने मेरी पैंट खोली और मेरा मोटा लंड बाहर निकाला। वो घुटनों के बल बैठ गई और उसकी गर्म सांस मेरे लंड पर पड़ी। "कितना बड़ा है तेरा लंड, गांव के लड़कों जैसा नहीं।" उसने जीभ से चोटी चाटी और फिर पूरा मुंह में ले लिया। चूसते हुए "चुप चुप" की आवाजें आ रही थीं। उसका मुंह गर्म था, जीभ लंड के नीचे घुमाती। मैंने उसके बाल पकड़कर धक्के मारे। "हां मीरा, और जोर से चूस, मेरी रांड।" वो और तेज चूसने लगी, लार उसके मुंह से निकलकर मेरे अंडों पर गिर रही थी।

फिर मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी साड़ी ऊपर चढ़ाई। नीचे कुछ नहीं पहना था। उसकी चूत पूरी गीली थी, बालों से भरी हुई, होंठ फूले हुए। मैंने उंगली डाली तो "आह्ह" की आवाज निकली। "विक्रम, मेरी चूत फाड़ दे, बहुत दिनों से सूखी पड़ी है।" मैंने मुंह लगाया और चूत चाटने लगा। उसका स्वाद नमकीन और मीठा था। जीभ से क्लिट को रगड़ता, अंदर तक घुसाता। मीरा चीख रही थी, "ओह्ह विक्रम, और चाट, मेरी चूत का रस पी ले।" उसकी जांघें कांप रही थीं। जब वो झड़ने लगी तो उसने मेरा सिर दबा लिया और गरम गरम रस मेरे मुंह में छोड़ दिया।

अब बारी थी चोदने की। मैंने उसकी टांगें फैलाईं और लंड चूत पर रखा। धीरे से धक्का दिया। "आह्ह, दर्द हो रहा है!" लेकिन मैंने और जोर लगाया। आधा लंड अंदर गया तो उसकी चूत कस गई। "मीरा, तेरी चूत कितनी टाइट है।" फिर पूरा लंड अंदर घुसा दिया। वो चीख पड़ी। मैंने जोर जोर से चोदना शुरू किया। "थप थप" की आवाजें, उसकी गांड पर थप्पड़ मारते। "ले रंडी, मेरा लंड ले।" वो बोल रही थी, "हां विक्रम, मुझे गर्भवती कर दे, मेरे अंदर अपना बीज डाल।" ये सुनकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने उसकी गांड पकड़कर तेजी से धक्के मारे। पसीना बह रहा था, उसकी सांसें तेज।

हमने घंटों चोदा। अलग अलग पोजीशन में। डॉगी स्टाइल में उसकी गांड हिल रही थी, लंड अंदर बाहर हो रहा था। उसकी चूत से सफेद रस निकल रहा था। फिर मैंने उसे उल्टा लिटाया और गांड में उंगली डाली। "नहीं विक्रम, गांड में मत डाल।" लेकिन मैंने लंड गांड पर लगाया और धीरे धीरे घुसाया। वो दर्द से चीखी लेकिन फिर मजा आने लगा। "ओह्ह, गांड फट रही है, लेकिन अच्छा लग रहा है।" मैंने दोनों छेदों में बारी बारी से चोदा। आखिर में उसकी चूत में झड़ गया। गरम गरम वीर्य उसकी गर्भाशय तक गया।

ये सिलसिला हफ्तों चला। हर रात हम मिलते, चोदते। गांव की हवा में हमारी चुदाई की गंध फैलती। मीरा को गर्भ ठहर गया। उसके स्तन और बड़े हो गए, निप्पल्स काले। वो कहती, "विक्रम, तूने मुझे मां बना दिया। अब हमारी गांव वाली जिंदगी और प्यार भरी हो गई।" हमने शादी कर ली। अब हमारे दो बच्चे हैं लेकिन चुदाई अभी भी जारी है। गांव की जिंदगी, प्यार और बच्चे…

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ये सब मिलकर मेरी जिंदगी बदल गई। अब मैं शहर नहीं लौटना चाहता। मीरा की चूत और मेरे लंड की कहानी यहीं खत्म होती है लेकिन असली मजा तो अभी शुरू होता है हर रात।

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