नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूं। उम्र मेरी पच्चीस साल है और मैं एक छोटी सी आईटी कंपनी में जॉब करता हूं। आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाने जा रहा हूं जो मेरी गर्लफ्रेंड प्रिया के साथ हुई। प्रिया मेरी कॉलेज की दोस्त थी, अब हमारी लव स्टोरी तीन साल पुरानी है। वो बहुत सुंदर है, गोरी चमड़ी, मोटे-मोटे स्तन, पतली कमर और गोल-गोल गोलियां जैसी गांड। उसकी ऊंचाई पांच फुट पांच इंच है और जब वो रोती है तो उसके आंसू उसके गालों पर बहते हुए उसके होंठों तक आ जाते हैं, वो नजारा देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है।
एक शाम की बात है, बारिश हो रही थी। हम दोनों मेरे छोटे से फ्लैट में थे। प्रिया ऑफिस से थकी हुई आई थी। हमने पहले चाय पी, फिर बातें कीं। अचानक उसकी आंखों में आंसू आ गए। वो कहने लगी, “राहुल, मुझे डर लगता है कि तुम मुझे कभी छोड़ दोगे।” उसकी आवाज कांप रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और बोला, “प्रिया, तू मेरी जान है। आज मैं तुझे इतना प्यार करूंगा कि तू भूल जाएगी सब दर्द।” वो रो रही थी, लेकिन उसकी सांसें तेज हो रही थीं। मैंने उसके गालों के आंसू चूमे और फिर उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया।
हमारा किस गहरा हो गया। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट रही थी। मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले। उसके ब्रा के अंदर से उसके बड़े-बड़े स्तन बाहर निकल आए। निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह्ह राहुल… धीरे… मेरा दूध निकाल देगा क्या?” मैं हंस पड़ा और बोला, “हां रानी, आज तू मेरा ही हो जाएगी।” उसकी आंखों से आंसू अभी भी गिर रहे थे लेकिन अब वो मजे के आंसू थे।
मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार फेंके। वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। मैंने उसकी पैंटी के ऊपर हाथ फेरा। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। कपड़े के ऊपर से ही मैंने उसकी चूत को सहलाया। प्रिया कराह उठी, “राहुल… मेरी चूत जल रही है… अपनी उंगली डाल दे।” मैंने उसकी पैंटी उतारी। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, होंठ गुलाबी और बीच में से चमकदार रस टपक रहा था। मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और अंदर-बाहर करने लगा। वो जोर-जोर से रोने लगी, “आह्ह्ह… हां… और तेज… मेरी चूत फाड़ दे।” उसके आंसू बह रहे थे लेकिन वो मुझे और जोर से पकड़ रही थी।
फिर मैंने अपना लंड निकाला। मेरा लंड सात इंच लंबा और मोटा था, नसें उभरी हुई। प्रिया ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना बड़ा है तेरा लंड… आज मेरी चूत को फाड़ देगा।” मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसके पैर फैलाए और लंड की नोक उसकी चूत पर रखी। धीरे से धक्का मारा। लंड का सिरा अंदर घुस गया। प्रिया चीखी, “आह्ह्ह मर गई… धीरे राहुल… जल रहा है।” लेकिन मैंने और जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैं धीरे-धीरे पुश करता रहा। पूरा लंड अंदर घुसते ही प्रिया जोर से रो पड़ी, “आह्ह्ह… राहुल… तू मुझे मार डालेगा… लेकिन मत रुक… और गहरा चोद।” उसके आंसू तकिये पर गिर रहे थे।
मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड अंदर-बाहर हो रहा था। चूत से चप-चप की आवाजें आ रही थीं। प्रिया के स्तन उछल रहे थे। मैं झुककर उसके निप्पल चूसता, फिर उसके मुंह में अपनी जीभ डालता। वो रोते-रोते बोली, “राहुल…

मुझे प्यार कर… मैं तेरी हूं… मेरी चूत तेरी है… चोद मुझे… फाड़ दे मेरी गांड भी।” मैंने उसकी गांड के नीचे हाथ डाला और एक उंगली उसके गांड के छेद में डाली। वो और जोर से रोने लगी।
हमने पोजीशन बदली। प्रिया ने घुटनों के बल बैठकर मुझे घोड़ी बना लिया। मैं पीछे से उसकी चूत में लंड घुसा रहा था। उसकी गांड के दोनों गोल हिस्से थपथपा रहे थे। मैंने उसके बाल पकड़े और जोर-जोर से धक्के मारे। प्रिया चिल्ला रही थी, “आह्ह्ह… हां… मेरी चूत का रस निकाल ले… मैं झड़ने वाली हूं…” उसकी चूत से गर्म-गर्म रस निकलकर मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने और तेजी से चोदा।
फिर हम आमने-सामने हो गए। प्रिया मेरे ऊपर बैठ गई। उसने मेरा लंड अपनी चूत में लिया और ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे मुंह के सामने झूल रहे थे। मैं उन्हें चूसता और वो रोती हुई बोली, “राहुल… तेरा लंड मेरी चूत को पूरी तरह भर रहा है… मैं पागल हो जाऊंगी… और चोद… मुझे प्यार से चोद।” उसके आंसू मेरे सीने पर गिर रहे थे। मैंने उसे पीछे लिटाया और फिर से मिशनरी पोजीशन में चोदने लगा।
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। कमरे में सिर्फ हमारी सांसें, चूत-लंड की चप-चप और प्रिया की रोने की आवाजें गूंज रही थीं। मैंने कहा, “प्रिया… मैं झड़ने वाला हूं… अंदर डाल दूं क्या?” वो रोते हुए बोली, “हां… मेरी चूत में अपना गरम माल भर दे… आज मैं तेरी बच्ची बनना चाहती हूं।” मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना सारा वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। प्रिया भी झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया। हम दोनों एक साथ चीखे।
उसके बाद हम गले मिलकर लेट गए। प्रिया अभी भी रो रही थी लेकिन अब वो खुशी के आंसू थे। वो बोली, “राहुल… आज तूने मुझे सच में अपना बना लिया।” मैंने उसके बाल सहलाए और बोला, “तू हमेशा मेरी रहेगी।” हमने फिर से शुरू किया। इस बार धीरे-धीरे, रोमांटिक तरीके से। लंबी रात थी। प्रिया की चूत बार-बार झड़ती रही और मैं उसकी गांड, चूत और मुंह सब जगह अपना लंड घुसाता रहा। सुबह तक हम थक चुके थे लेकिन प्यार और भी गहरा हो गया था।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती दोस्तों, अगली बार और डिटेल में सुनाऊंगा कि कैसे हमने पूरे हफ्ते भर चोद-चोद कर एक-दूसरे को पागल किया। प्रिया की रोने वाली आवाज अब भी मेरे कानों में गूंजती है।)