नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं हैदराबाद में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में सीनियर डेवलपर हूं। उम्र 28 साल, अच्छी कद-काठी, लंबा शरीर और रोज जिम जाने से टाइट मसल्स। मेरी शादी दो साल पहले गांव की एक लड़की से हुई थी। नाम था सीमा, लेकिन उसकी मौत हो गई थी। अब मैं उसका आलूडू हूं, यानी ससुराल वालों का दामाद। साल में एक-दो बार गांव जाता हूं ससुराल। गांव है आंध्र के पास एक छोटा सा कस्बा, जहां खेत, मिट्टी की सड़कें और घने पेड़। पिछले महीने ऑफिस से छुट्टी लेकर गांव गया था।
गांव पहुंचते ही गर्मी और नमी का मिश्रण महसूस हुआ। ससुराल वाले मुझे देखकर खुश हुए। लेकिन असली कहानी शुरू हुई जब मैंने सीमा की बड़ी बहन राधा को देखा। राधा 32 साल की, विधवा थी। पति की मौत के बाद वह ससुराल में ही रहती थी। उसका शरीर देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। गोरी चमड़ी, भारी-भारी स्तन जो ब्लाउज में फटे पड़ रहे थे, चौड़ी कमर और मोटी-मोटी जांघें। गांव की औरतों जैसी देह, लेकिन आंखों में एक अजीब सी भूख।
पहले दिन शाम को हम सब खेत के पास बैठे बातें कर रहे थे। राधा मेरे पास बैठी थी। उसकी साड़ी की पल्लू सरक गई और उसके गोरे स्तन का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा। मैं चुपके से उसकी तरफ देख रहा था। राधा ने भी नजर मिलाई और मुस्कुरा दी। रात को जब सब सो गए, मैं बाहर बरामदे में घूम रहा था। तभी राधा चुपके से आई।
"राहुल, तुम्हें नींद नहीं आ रही?" उसने धीरे से पूछा। उसकी आवाज में कुछ और ही था। मैंने कहा, "हां राधा, गांव की हवा में नींद नहीं आती।" वह पास आई, उसकी सांस गर्म थी। "तुम हैदराबाद में सॉफ्टवेयर का काम करते हो ना? शहर की लड़कियों से बात करते होगे?" मैंने उसके स्तन की तरफ देखते हुए कहा, "शहर की लड़कियां तुम्हारी तरह नहीं होतीं राधा। तुम्हारा शरीर देखकर मन नहीं लगता।"
राधा शरमा गई लेकिन आगे बढ़ गई। उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा। "राहुल, मैं विधवा हूं। कोई नहीं पूछता। अगर तुम चाहो तो…" उसकी बात अधूरी रही। मैंने उसे खींच लिया और उसके होठों पर अपना मुंह लगा दिया। पहले तो वह झिझकी, लेकिन फिर जोर से चूमने लगी। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। दो बड़े-बड़े स्तन बाहर निकल आए, काले-काले निप्पल खड़े हो चुके थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। राधा चीख पड़ी, "आह्ह्ह… राहुल, चूसो जोर से… मेरे स्तन दूध से भरे हैं जैसे…"
मैंने दूसरे स्तन को हाथ में लिया और दबाने लगा। दूध की बूंदें निकल आईं। मैंने चाट लिया। राधा का हाथ मेरे लंड पर गया। उसने पैंट के ऊपर से ही दबाया। "कितना मोटा है तुम्हारा लंड… सॉफ्टवेयर वाला लंड गांव की चूत को फाड़ देगा।" मैंने उसकी साड़ी उठाई। अंदर कुछ नहीं पहना था। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, बाल काले-काले और घने। मैंने उंगली डाली। चूत गर्म और टाइट थी। "राधा, तुम्हारी चूत कितनी गीली है…

रस बह रहा है।"
उसने मेरी पैंट खोली। मेरा लंड फण फैलाए बाहर आ गया। सात इंच लंबा, मोटा और नसों से भरा। राधा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। "कितना गरम है… गांव में ऐसा लंड कभी नहीं देखा।" वह घुटनों पर बैठ गई और लंड मुंह में ले लिया। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से चोदने लगा मुंह में। "राधा, चूस जोर से… पूरा लंड गले तक ले ले।" थूक की आवाजें आ रही थीं।
फिर मैंने उसे खड़ा किया और दीवार से टिका दिया। उसकी एक टांग उठाई और लंड चूत में घुसा दिया। "आह्ह्ह… राहुल… धीरे… चूत फट जाएगी!" लेकिन मैंने जोर से धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। चूत का रस बह रहा था। मैं धीरे-धीरे जोर लगाकर पूरा लंड अंदर कर दिया। राधा चीख रही थी, "चोदो मुझे… गांव की चूत को शहर के लंड से चोदो… आह्ह्ह… और जोर से!"
हम तीस मिनट तक उसी पोजीशन में चोदते रहे। उसके स्तन मेरे मुंह में, लंड चूत में अंदर-बाहर। फिर मैंने उसे जमीन पर लिटाया। कुत्ते वाली स्टाइल में। उसकी मोटी गांड ऊपर उठाई और लंड पीछे से घुसाया। "राधा, तुम्हारी गांड भी कितनी नरम है… चोदते-चोदते फाड़ दूंगा।" मैंने गांड पर थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। राधा चिल्ला रही थी, "मेरा नाम लेकर चोदो… राहुल… तुम्हारा लंड मेरी चूत का मालिक है!"
हम दोनों झड़ गए। मेरा गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। रस बाहर निकल रहा था। लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। हम अंदर उसके कमरे में गए। फिर से शुरू हुआ। इस बार 69 पोजीशन में। मैं उसकी चूत चाट रहा था, वह मेरा लंड चूस रही थी। चूत का स्वाद नमकीन और मीठा था।
सुबह तक हमने तीन बार और चोदा। अलग-अलग पोजीशन में – ऊपर, नीचे, साइड में। राधा की चूत लाल हो गई थी, मेरे लंड पर खून और रस का मिश्रण। वह बार-बार चीख रही थी, "सॉफ्टवेयर आलूडू, मुझे अपनी रखैल बना लो… गांव में आकर रोज चोदो!"
अगले दिन जब मैं वापस शहर लौटा, राधा ने चुपके से कहा, "जल्दी आना राहुल… मेरी चूत तुम्हारे बिना सूख जाएगी।" अब हर महीने गांव जाता हूं। सॉफ्टवेयर का काम और गांव की चूत का रोमांस चलता रहता है।
(यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। 18+ केवल।)