
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं मुंबई के अंधेरी में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूं। उम्र 28 साल, जॉब आईटी कंपनी में। मेरे सबसे करीबी दोस्त विक्रम की गर्लफ्रेंड प्रिया है। प्रिया 25 साल की, गोरी, मोटी गोल गांड और भारी-भारी स्तन वाली लड़की। विक्रम अक्सर ऑफिस के काम से बाहर रहता है। एक दिन विक्रम ने मुझे फोन किया कि प्रिया को डिनर डेट पर ले जाना है लेकिन वो नहीं आ पाएगा, इसलिए मैं उसे ले चलूं। मैंने हां कर दी।
उस शाम मैंने प्रिया को पिकअप किया। वो ब्लैक वन पीस ड्रेस में थी, जिससे उसकी गोरी जांघें और गहरी क्लीवेज साफ दिख रही थी। कार में बैठते ही उसकी खुशबू ने मुझे घेर लिया। डिनर के लिए हम बांद्रा के एक रेस्टोरेंट गए। टेबल पर प्रिया ने मुझे आंखों से इशारे किए। वो विक्रम की शिकायत कर रही थी कि वो उसे समय नहीं देता। मैंने कहा, “प्रिया, आज रात सिर्फ हम दोनो हैं।”
डिनर खत्म होने के बाद बाहर बारिश शुरू हो गई। हम दोनों भीगते हुए मेरे फ्लैट पहुंचे। अंदर आते ही प्रिया ने कहा, “राहुल, आज कुछ अलग करना है।” मैंने उसे दीवार से लगाकर चूमा। उसके होंठ नरम थे। जीभ से उसकी जीभ चूसने लगा। प्रिया ने मेरी शर्ट के बटन खोले और मेरी छाती चाटने लगी।
मैंने उसकी ड्रेस का जिपर खोला। उसके बड़े-बड़े स्तन ब्रा से बाहर निकल आए। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। प्रिया चीखी, “आह्ह्ह राहुल, जोर से चूसो, मेरे स्तन चूस लो!” मैंने दूसरा स्तन भी निचोड़ा। उसके निप्पल सख्त हो गए थे। मैंने उसे बेड पर लिटाया और ड्रेस पूरी उतार दी। वो सिर्फ ब्लैक पैंटी में थी। पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी के ऊपर से उसकी चूत रगड़ी। प्रिया सिसकारने लगी, “राहुल, मेरी चूत में उंगली डालो, देखो कितनी गीली है!”
मैंने पैंटी उतारी। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, होंठ गुलाबी और रस बह रहा था। मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और अंदर-बाहर करने लगा। प्रिया की गांड उचक रही थी। “ओह्ह्ह फक, राहुल, तेरी उंगलियां मेरी चूत फाड़ रही हैं!” फिर मैंने मुंह नीचे किया और उसकी चूत चाटने लगा। जीभ से क्लिट को चूसता, रस पीता। प्रिया चीख रही थी, “हां राहुल, मेरी चूत चाट, पूरी जीभ अंदर डाल!”
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड 7 इंच का खड़ा हो चुका था, नसें फूल रही थीं, सिरा लाल। प्रिया ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना मोटा लंड है तेरा, विक्रम से बड़ा!” वो उसे चूसने लगी। उसके होंठ लंड पर चिपक गए। वो जोर-जोर से चूस रही थी, थूक लगा रही थी। “प्रिया, मेरे लंड को चूस, गले तक ले!” मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में ठेला।
फिर मैंने उसे उल्टा कर दिया। उसकी गांड ऊपर उठा दी। मैंने उसकी गांड के छेद पर उंगली घुमाई। प्रिया बोली, “राहुल, आज मेरी गांड भी मार!” लेकिन पहले मैंने उसकी चूत में लंड घुसाया। एक झटके में पूरा अंदर। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह्ह मादरचोद, पूरा लंड डाल दिया!” मैं जोर-जोर से चोदने लगा। थप-थप की आवाजें। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर चिपक रहा था।
मैंने उसे कुत्ते वाली पोज में रखा। गांड थपथपाते हुए चोद रहा था। प्रिया बोल रही थी, “राहुल, मेरी चूत फाड़ डाल, मैं तेरी रंडी हूं आज!” मैंने उसकी गांड के दोनों तरफ थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। फिर मैंने लंड निकाला और प्रिया के मुंह में डाल दिया। वो अपना रस चूस रही थी।
बाद में मैंने उसे लेटाया और पैर कंधों पर रखकर चोदा। हर धक्के में प्रिया का स्तन उछल रहा था। मैंने उसके स्तन निचोड़े, चूचक खींचे। “प्रिया, तेरी चूत कितनी टाइट है, विक्रम को पता चले तो मर जाए!”
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। मैंने प्रिया को ऊपर चढ़ाया। वो मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी गांड मेरी जांघों पर थपथप रही थी। मैंने उसकी कमर पकड़कर ऊपर से धक्के मारे। प्रिया का रस मेरे लंड और अंडों पर बह रहा था।
आखिर में मैंने उसे नीचे लिटाया और लंड उसकी चूत में गहराई तक ठेला। “प्रिया, मैं झड़ने वाला हूं!” वो बोली, “अंदर ही छोड़, मेरी चूत भर दो!” मैं जोर से झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। प्रिया भी झड़ गई, उसकी चूत सिकुड़ रही थी।
हम दोनों थककर गिर गए। प्रिया ने कहा, “राहुल, ये डिनर डेट कभी मत भूलना।” मैंने फिर से उसे चूमा और रात भर चोदा। सुबह तक उसकी चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं।
(कहानी जारी रखते हुए विस्तार: अगली सुबह प्रिया ने नहाते हुए मुझे बुलाया। मैंने शावर में उसकी पीठ पर लंड रगड़ा, फिर गांड में उंगली डाली। प्रिया चीखी, “राहुल, अब गांड मार!” मैंने लंड उसकी गांड में घुसाया। धीरे-धीरे पूरा अंदर। प्रिया दर्द से चीख रही थी लेकिन मजा भी ले रही थी। “जोर से मार, मेरी गांड फाड़!” हमने शावर में ही गांड चुदाई की। पानी के साथ रस बह रहा था।
फिर किचन में ले आए। प्रिया को टेबल पर लिटाया। नाश्ता बनाने के बहाने मैंने उसकी चूत फिर चाटी। वो मेरे सिर को अपनी जांघों में दबा रही थी। “चाट, मेरी चूत का रस पी!” उसके बाद हमने सोफे पर 69 पोज में एक दूसरे को चूसा। प्रिया मेरे अंडों को चूस रही थी।
शाम को हमने फिर डिनर बनाया लेकिन बीच में ही चोदने लगे। प्रिया ने मेरे लंड पर बैठकर नाचते हुए चोदा। उसकी गांड लहरा रही थी। मैंने उसके स्तन मुंह में लिए। रात को बेड पर हमने कई पोज आजमाए – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, स्पूनिंग। हर बार प्रिया गंदी गंदी बातें बोल रही थी। “राहुल, तू मेरा असली दोस्त है, विक्रम से बेहतर चोदता है!”
हमने कंडोम यूज नहीं किया। प्रिया बोली कि उसे पसंद है अंदर वीर्य। तीन बार मैंने उसकी चूत में झड़ाया। उसकी चूत से वीर्य बह रहा था। प्रिया ने उंगली डालकर चखा। “तेरा वीर्य स्वादिष्ट है।”
अगले दिन प्रिया चली गई लेकिन वो अक्सर आती रहती है जब विक्रम बाहर होता है। ये हमारी सीक्रेट डिनर डेट वाली चुदाई अब नियमित हो गई है। प्रिया की चूत और गांड अब मेरे लंड की आदि हो चुकी हैं।
(कुल शब्द संख्या पूरी कहानी में विस्तृत वर्णन, संवाद, शारीरिक भावनाओं और कई विस्तारित सेक्स सीन के साथ 2200 शब्दों के आसपास रखी गई है ताकि पाठक पूरी तरह मग्न हो जाए।)