नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी २८ साल है। ये कहानी मेरी असली जिंदगी की है, जब मेरी पड़ोस वाली भाभी मीरा के साथ क्या कुछ हो गया। मीरा ३५ साल की, गोरी, मोटी-तगड़ी, भारी भरे स्तन और चौड़ी कमर वाली औरत। उसके पति अक्सर बाहर रहते थे।
एक शाम बारिश हो रही थी। मैं अपने कमरे में अकेला बैठा था। अचानक मीरा भाभी ने दरवाजा खटखटाया। वो एक पुराना MP3 प्लेयर लेकर आई थी। “रोहन, ये deshi hindi lok geet mp3 है, पुराने लोक गीत। मेरे पास चार्जर नहीं है, तुम्हारे पास सुन सकते हैं क्या?” उसकी आवाज में कुछ गर्माहट थी।
मैंने उसे अंदर बुलाया। हम दोनों बेड पर बैठ गए। MP3 प्लेयर ऑन किया। लोक गीत बजने लगे – “मेरी बिंदिया रे…” जैसी पुरानी धुनें। गाने में देहाती माहौल, औरत-मर्द की बातें। भाभी मुस्कुरा रही थी। बारिश की आवाज बाहर, अंदर गाने की धुन और हम दोनों की सांसें।
धीरे-धीरे भाभी करीब आई। उसके स्तन मेरी बांह से छू रहे थे। “रोहन, ये गाने सुनते हुए मुझे कुछ याद आता है… पुरानी बातें।” मैंने हिम्मत करके पूछा, “कैसी बातें भाभी?” उसने सीधा जवाब दिया, “चोदने वाली बातें।”
मैं हैरान हुआ लेकिन लंड पहले से खड़ा हो चुका था। भाभी ने खुद मेरी जांघ पर हाथ रखा। “तुम्हारा लंड खड़ा हो गया है ना? मैं देख रही हूँ।” उसने पैंट के ऊपर से ही दबाया। मैंने भी हिम्मत करके उसके स्तन को छुआ। “भाभी, ये बहुत बड़े हैं।”
“चूस ले इनको,” वो बोली। मैंने उसकी ब्लाउज खोली। अंदर काला ब्रा। स्तन बाहर निकले – गोरे, भारी, निप्पल सख्त। मैं एक को मुंह में लिया और चूसने लगा। भाभी सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह… रोहन… चूस… जोर से चूस मेरी गांडू मम्मे।”
गाने अभी भी बज रहे थे। लोक गीत में औरत मर्द को बुला रही थी। भाभी ने मेरी पैंट खोली। मेरा लंड बाहर आया – ७ इंच का, मोटा, नसें उभरी हुई, सिरा लाल। “वाह, कितना मोटा लंड है तेरा। आज मेरी चूत फाड़ दे।” उसने हाथ में लिया और ऊपर-नीचे करने लगी। फिर मुंह में डाल लिया। जीभ से लंड के सिरे को चाटते हुए चूस रही थी। “चल… चूस… भाभी का मुंह चोद।”
मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में लंड ठेला। “ले… ले भाभी… पूरा गला तक ले।” थूक की आवाजें आने लगीं। भाभी का मुंह गीला हो गया था।
फिर मैंने उसे लिटाया। साड़ी ऊपर उठाई। पैंटी गीली थी। “भाभी की चूत देख… कितना पानी निकल रहा है।” मैंने पैंटी उतारी। चूत गुलाबी, बाल कटे हुए, होंठ मोटे, अंदर से गुलाबी मांस। मैंने उंगली डाली। “आह्ह…

उंगली मत… लंड डाल।”
मैंने जीभ से चाटना शुरू किया। चूत का स्वाद नमकीन-मीठा। “चाट… मेरी चूत चाट… लोक गीत सुनते हुए चोद मुझे।” भाभी चीख रही थी। मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और तेजी से हिलाने लगा। पानी छिटक रहा था।
अब लंड चूत पर रखा। “डाल… फाड़ दे मेरी चूत।” एक झटके में आधा लंड अंदर। “आह्ह… मर गई… मोटा है… धीरे…” लेकिन मैंने जोर लगाया। पूरा लंड घुस गया। चूत कसी हुई, गर्म, गीली। “चोद… जोर से चोद… लोक गीत की धुन पर चोद।”
हम गाने की ताल पर चोदने लगे। “थाप… थाप…” की आवाज। भाभी के स्तन उछल रहे थे। मैं झुककर चूसता, काटता। “तेरी चूत कितनी टाइट है भाभी।” “तेरा लंड लेके मजा आ रहा है… और जोर से… मेरी गांड भी मार।”
मैंने पोजीशन बदली। कुत्ते वाली। भाभी घुटनों पर, गांड ऊपर। मैं पीछे से लंड डाला। गांड के चूतड़ लाल हो रहे थे। थप्पड़ मारता, “ले… मेरी रंडी भाभी… ले लंड।” “हां… मार… गांड मार… चूत फाड़।”
लंबे समय तक चोदा। पसीना बह रहा था। गाने अभी भी चल रहे थे। भाभी का पहला झड़ना – “आह्ह… आ रहा है… चूत से पानी…” गरम पानी लंड पर छूटा।
फिर मैंने उसे पीठ के बल लिटाया, टांगें कंधों पर। गहरा चोदना। “भाभी… मैं झड़ने वाला हूं।” “अंदर डाल… गर्भाशय तक… बीज भर दे।” मैं फूट पड़ा। गरम-गरम वीर्य चूत में भर दिया।
लेकिन खत्म नहीं हुआ। भाभी ने मुंह साफ किया और फिर से लंड चूसा। दूसरी बार चोदा – इस बार गांड में। “गांड़ मार… दर्द दे… मेरा छेद फाड़।” तेल लगाया, लंड घुसाया। गांड कसी, लेकिन धीरे-धीरे खुली। “आह्ह… धीरे… अब जोर से… गांड चोद।”
हम घंटों चोदते रहे। लोक गीत बजते रहे। चूत का रस, लंड का वीर्य, पसीना, चीखें, गालियां – सब मिलकर रात भर चली। सुबह तक भाभी थक चुकी थी, चूत और गांड लाल-लाल।
“रोहन, अब रोज आएंगे ये गीत सुनने?” मैंने कहा, “हां भाभी, और चोदने भी।”
ये थी मेरी deshi hindi lok geet mp3 वाली रात।