नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूँ। उम्र मेरी 28 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। रोज सुबह ऑफिस जाना, शाम को थककर लौटना, यही रूटीन था। लेकिन पिछले साल जब मेरे बगल वाले फ्लैट में एक नई किरायेदार आई तो सब कुछ बदल गया। उसका नाम था सीमा, बिहार के छपरा जिले से। उम्र करीब 32 साल, शादीशुदा लेकिन पति विदेश में काम करता था। वो हमेशा चमकदार सिल्क की साड़ी पहनकर घूमती थी – लाल, हरा, नीला, हर रंग की साड़ी में उसकी मोटी कमर और भारी गांड और भी ज्यादा उभर आती थी।
पहली बार जब मैंने उसे सीढ़ियों पर देखा तो उसकी साड़ी की पल्लू थोड़ी ढीली थी और नीचे से उसकी सफेद चोली के अंदर से मोटे-मोटे स्तन झलक रहे थे। सीमा ने मुस्कुराते हुए नमस्ते किया। उसकी आवाज में बिहारी लहजा था – मीठी लेकिन थोड़ी भारी। “राहुल भाई, पानी का कनेक्शन ठीक करवाना है, मदद कर दोगे?” मैंने हाँ कहा और उसी शाम उसके फ्लैट में गया। अंदर घुसते ही मुझे उसकी साड़ी की खुशबू ने घेर लिया – इत्र और पसीने का मिश्रण। सीमा झुककर फ्रिज से पानी निकाल रही थी, उसकी साड़ी की पीठ खुली हुई थी और नाभि के नीचे पेट की मोटी लेयर साफ दिख रही थी।
मैंने पानी का नल ठीक किया तो वो मेरे पास आकर खड़ी हो गई। “बहुत मेहरबानी राहुल भाई, अकेली औरत हूँ, कोई मदद करे तो अच्छा लगता है।” उसकी सांस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी। मैंने हिम्मत करके पूछा, “आप बिहार से हो ना? साड़ी में बहुत अच्छी लगती हो।” सीमा हँसी और बोली, “हाँ भाई, बिहारी औरतें साड़ी में ही असली लगती हैं। अंदर कुछ और भी देखना है क्या?” उसकी आँखों में शरारत थी। मैंने आगे बढ़कर उसकी कमर पकड़ ली। सीमा ने रोका नहीं।
उसने दरवाजा बंद किया और मुझे सोफे पर बैठा दिया। फिर वो मेरे सामने खड़ी होकर साड़ी का पल्लू धीरे-धीरे खिसकाने लगी। उसकी चोली के नीचे से 36 इंच के भारी स्तन उभर आए, निप्पल सख्त हो चुके थे। “देखो राहुल, मेरी छाती कितनी भारी है, पति तो महीनों से नहीं छुआ।” मैंने हाथ बढ़ाकर उसकी एक चूची दबा ली। सीमा सिसकने लगी, “आह्ह… जोर से दबाओ, चूसो इनको।” मैंने उसकी चोली खोल दी और दोनों स्तनों को मुँह में लेकर चूसने लगा। जीभ से निप्पल घुमाता, दाँतों से काटता। सीमा की साड़ी अब कमर तक उतर चुकी थी। नीचे पेटीकोट में उसकी मोटी जाँघें और बीच में उभरी हुई चूत का उभार साफ दिख रहा था।
मैंने पेटीकोट की डोरी खींची। सीमा की चूत पूरी तरह गंजी थी, होंठ मोटे और गुलाबी, ऊपर से चिपचिपा रस टपक रहा था। “चूस मेरी चूत राहुल, जिभ डाल के चाट।” मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसकी जाँघें फैलाकर चूत पर मुँह लगा दिया। जीभ अंदर डालकर चाटने लगा – खट्टा-मीठा स्वाद, गर्म रस मेरे मुँह में भर रहा था। सीमा मेरे सर को दबा रही थी, “और अंदर, और तेज… मेरी चूत फट रही है भाई।” मैंने उसकी चूत के होंठ चूसे, क्लिट को दाँतों से हल्का काटा। सीमा जोर-जोर से चीख रही थी, “आह्ह्ह…

मर गई रे, चूत का पानी निकाल दो!”
फिर सीमा ने मुझे खड़ा किया और मेरी पैंट उतार दी। मेरा लंड 7 इंच का खड़ा हो चुका था, नसें फूल रही थीं, सिरे से पानी टपक रहा था। “कितना मोटा लंड है तेरा, बिहारी चूत को फाड़ देगा।” उसने घुटनों के बल बैठकर लंड मुँह में लिया। जीभ से सिरे को चाटते हुए पूरा अंदर ले गई। “गले तक ले रही हूँ, देख कैसे चूसती हूँ।” थूक से लंड चिकना करके वो जोर-जोर से चूस रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में ठोकना शुरू किया। “ले सीमा, पूरा लंड गले में, तेरी बिहारी रंडी वाली चूत के लिए तैयार कर।”
थोड़ी देर बाद सीमा उठी और सोफे पर झुक गई। साड़ी अब सिर्फ कमर पर लिपटी हुई थी। उसने पीछे से गांड ऊपर उठाई। “अब चोद मुझे राहुल, पीछे से डाल लंड मेरी चूत में।” मैंने लंड उसके चूत के मुँह पर रखा और एक जोरदार झटके से पूरा अंदर घुसा दिया। सीमा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… फट गई मेरी चूत! मोटा लंड है रे तेरा!” मैंने पकड़कर उसकी कमर और जोर से ठोकना शुरू किया। थप-थप की आवाज, उसकी चूत से निकलता चिपचिपा रस मेरे लंड पर फैल रहा था। “ले, ले मेरी बिहारी साड़ी वाली रंडी, तेरी चूत को फाड़ दूँगा।” सीमा भी पीछे धक्का दे रही थी, “और जोर से, गांड भी मार, पूरी चूत में डाल!”
हमने पोजीशन बदली। सीमा को पीठ के बल लिटाया, दोनों टाँगें कंधों पर रखकर चोदने लगा। हर झटके में लंड पूरा बाहर निकालकर फिर अंदर घुसाता। सीमा के स्तन उछल रहे थे, वो अपने निप्पल चूस रही थी। “चूसो मेरे स्तन, दूध निकाल दो, चोदते-चोदते।” मैंने झुककर एक चूची मुँह में ली और साथ में चूत में ठोकता रहा। सीमा का पहला झड़ना आ गया – चूत से गर्म रस फूटा और मेरे लंड पर बहने लगा।
अगले घंटे हमने और कई तरीके आजमाए। सीमा ने मुझे लिटाकर ऊपर चढ़कर लंड अपनी चूत में डाला और कूदने लगी। “देख कैसे नाच रही हूँ तेरे लंड पर, बिहारी औरत की भूख देख!” उसकी गांड के दोनों फटक उछल रहे थे। मैंने उसकी गांड में उंगली डाल दी। सीमा और जोश में आ गई, “हाँ, गांड भी फाड़, दो उंगली डाल!” थोड़ी देर बाद मैंने उसे कुत्ते वाली स्टाइल में घुमाया। अब लंड उसकी गांड के छेद पर रखा। “गांड मारूँ?” “हाँ भाई, गांड में डाल, आज पूरी तरह फाड़ दे मेरी!”
लंड की नोक से गांड के छेद को चिकना किया और धीरे-धीरे अंदर घुसाया। सीमा दर्द से चीखी लेकिन पीछे धक्का दे रही थी। “आह्ह… जल रहा है, लेकिन और अंदर, पूरा लंड गांड में!” जब आधा लंड अंदर गया तो मैंने जोर लगाया। सीमा का शरीर काँपने लगा। “फट गई गांड रे, लेकिन मजा आ रहा है!” अब मैं तेजी से गांड मारने लगा। थप-थप, सीमा की साड़ी अब पूरी तरह फर्श पर गिरी हुई थी। हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। सीमा बार-बार झड़ रही थी – चूत और गांड दोनों से रस बह रहा था।
आखिर में मैंने सीमा को घुमाकर सामने से चोदा। “अब मेरे लंड का पानी तेरी चूत में डालूँ?” “हाँ, भर दे मेरी चूत, गर्भवती कर दे!” मैंने जोर से अंतिम झटके मारे और गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में उंडेल दिया। सीमा भी एक साथ झड़ गई। हम दोनों थककर गिर पड़े। सीमा ने मुझे चूमते हुए कहा, “राहुल, अब रोज आना, ये बिहारी साड़ी वाली चूत तेरे लिए ही है।”
उस रात के बाद से सीमा मेरे फ्लैट भी आने लगी। कई बार वो सिर्फ साड़ी में आती, अंदर कुछ नहीं पहनती। हम पूरे हफ्ते चोदते रहे – सुबह, शाम, रात। उसकी चूत का स्वाद, गांड की कसावट, स्तनों का वजन – सब कुछ याद है। दिल्ली की गर्मी में भी हम पसीने-पसीने होकर चोदते, साड़ी गीली हो जाती, फिर नंगी होकर नहाते। सीमा हमेशा बोलती, “तेरा लंड मेरी बिहारी चूत का मालिक है।”
ये कहानी सच है दोस्तों। अगर आपको और डिटेल चाहिए तो बताना, सीमा अभी भी मेरे पास है।