नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली से हूँ लेकिन पिछले साल अपने गांव में छुट्टियां बिताने गया था। गांव का नाम था बिजनौर के पास एक छोटा सा देहाती इलाका। वहाँ मेरे चाचा का घर था। दिन भर खेतों में घूमता, शाम को नदी के किनारे बैठता। एक दिन शाम को नदी के पास एक मेला लगा था। वहाँ एक देहाती लड़की नाच रही थी। उसका नाम था मीना। उम्र शायद उन्नीस-बीस साल। काली-कलूटी, मोटी कमर, भारी-भारी स्तन जो उसकी पतली ब्लाउज में अटके हुए थे। वो ओपन डांस कर रही थी। मतलब डांस में वो अपनी साड़ी ऊपर चढ़ा के जांघें दिखा रही थी, कमर हिला-हिला के गांड हिला रही थी। लोग तालियाँ बजा रहे थे लेकिन मेरी नजर सिर्फ उसकी चूत की तरफ थी जो साड़ी के कपड़े के नीचे छुपी हुई थी।
मैं पास जाकर खड़ा हो गया। मीना ने मुझे देखा और मुस्कुराई। डांस खत्म होने के बाद वो मेरे पास आई। "भैया, तुम शहर से आए हो ना? डांस कैसा लगा?" उसकी आवाज में गंदगी भरी हुई थी। मैंने कहा, "बहुत बढ़िया लगा, खासकर जब तुम अपनी गांड हिला रही थी।" वो हँसी और बोली, "अरे वाह, सीधा बोलते हो। चलो, मेरे साथ खेत के पीछे चलो।"
हम दोनों खेत के पीछे एक झोपड़ी में गए। अंदर अंधेरा था। मीना ने अपनी साड़ी उतार दी। उसके स्तन आजाद हो गए। बड़े-बड़े, काले निप्पल वाले। मैंने तुरंत उनको हाथ में लिया और चूसने लगा। "आह्ह्ह…

चूसो और जोर से, राहुल। मेरे स्तन दूध से भरे हैं जैसे।" वो चीख रही थी। मैंने उसके एक स्तन को मुंह में लिया और चूसता रहा जबकि दूसरा हाथ उसकी चूत पर घुमाने लगा। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। बालों वाली, गर्म चूत। उंगलियां अंदर डाली तो वो सिसकने लगी। "अंगुली मत डाल, लंड डाल ना। मेरी चूत फटे जा रही है।"
मैंने अपना लंड निकाला। सात इंच का मोटा लंड। मीना ने उसे हाथ में लिया और चाटने लगी। "वाह, शहर वाला लंड। कितना कड़ा है।" वो पूरी लंड को मुंह में ले रही थी, गले तक। थूक से लंड चमक रहा था। मैंने उसके बाल पकड़ के मुंह चोदा। "ले, देहाती रंडी, लंड चूस।" वो "ग्लक ग्लक" की आवाजें निकाल रही थी।
फिर मैंने उसे घुटनों के बल बिठाया। पीछे से उसकी गांड चाटी। गांड में जीभ डाली। वो चीख रही थी, "आह्ह्ह… गांड चाटो, मेरी खुली गांड चाटो।" मैंने लंड उसकी चूत में घुसाया। एक झटके में पूरा अंदर। "उफ्फ्फ… फट गई मेरी चूत!" वो चिल्लाई। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। थाप-थाप की आवाजें। उसकी चूत से रस निकल रहा था, मेरे लंड पर बह रहा था। "चोदो मुझे, देहाती लड़की को शहर वाले लंड से चोदो। मेरी चूत फाड़ दो।"
हम पोजीशन बदलते रहे। पहले कुत्ते वाली, फिर वो ऊपर चढ़ी। उसकी भारी गांड मेरे लंड पर उछल रही थी। स्तन हिल रहे थे। मैंने उसके निप्पल खींचे। "दर्द हो रहा है, और जोर से खींचो।" फिर मैंने उसे दीवार से टिका के चोदा। लंड अंदर-बाहर हो रहा था। चूत का रस फर्श पर टपक रहा था।
लगभग आधा घंटा चोदा। आखिर में मैंने लंड निकाला और उसके मुंह में डाल दिया। गरम-गरम माल उसके गले में उतारा। वो सब पी गई। "स्वाद अच्छा है, शहर का।" हम दोनों पसीने से तर हो गए थे।
मीना ने कहा, "कल फिर आना, और लंबे समय तक चोदना।" मैं हर शाम उसके पास जाता। एक बार हम नदी के किनारे चोदे। पानी में खड़े होकर। उसकी चूत पानी में डूबी हुई थी लेकिन लंड अंदर घुसा हुआ। दूसरी बार उसके घर में जब उसके माँ-बाप खेत में गए थे। बिस्तर पर लेट के हमने लंबा सेक्स किया। मीना की चूत बहुत टाइट थी, हर बार नया मजा आता।
एक दिन उसने मुझे अपनी गांड भी चुदाई दी। पहले थोड़ा तेल लगाया, फिर लंड घुसाया। वो दर्द से चीख रही थी लेकिन फिर मजा आने लगा। "गांड मारो, पूरी गांड फाड़ दो।" हम दोनों थक जाते लेकिन फिर से शुरू कर देते। उसकी देहाती खुशबू, पसीना, चूत का रस सब मिलकर मुझे पागल बना देता।
इस तरह कई हफ्ते बीते। आखिर में जब मुझे दिल्ली लौटना पड़ा तो मीना रो पड़ी। लेकिन उसने कहा, "अगली बार आना, फिर खुलकर डांस करूंगी और तुम चोदोगे।" अब भी याद आती है वो रातें। देहाती लड़की का ओपन डांस और उसके बाद की गंदी चुदाई।
(शेष कहानी विस्तार से: अगले दिन मीना ने मुझे बुलाया। हम खेत में गए। वहाँ घास पर लेटकर उसने अपनी साड़ी पूरी उतार दी। नंगी देह, काली त्वचा, मोटी जांघें, फूली हुई चूत। मैंने उसकी चूत चाटी। जीभ अंदर डाली, रस पीया। वो मेरे सिर को दबा रही थी। "और अंदर, चूत चूसो।" फिर उसने मेरा लंड चूसा, अंडकोष चाटे। हमने 69 पोजीशन में एक दूसरे को चाटा। उसके बाद लंबा सेक्स। तीन बार झड़ चुका था लेकिन वो और मांग रही थी। "और चोदो, मेरी चूत अभी भी भूखी है।" रात भर चोदा। सुबह तक उसकी चूत सूज गई थी लेकिन दोनों खुश थे। ऐसे ही कई सेशन। हर बार नई पोजीशन, नया मजा। गांड चुदाई, मुंह चुदाई, सब कुछ। देहाती लड़की की खुली सेक्स भूख ने मुझे पूरा कर दिया।)