नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिक है। मैं दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी ३२ साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। आज मैं आपको अपनी रियल लाइफ की एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरे और अक्षरा के बीच हुई। अक्षरा मेरी पड़ोस वाली है, उम्र उसकी २८ साल, शादीशुदा लेकिन पति बाहर जॉब करता है। वो बहुत ही सेक्सी है, गोरी चमड़ी, भारी-भारी स्तन, चौड़ी कमर और गोल-गोल गान्ड। जब से वो हमारे बिल्डिंग में आई है, मेरी नजर उस पर अटकी हुई थी।
एक दिन बारिश में वो स्कूटर लेकर घर आ रही थी। मैं भी ऑफिस से लौट रहा था। अचानक उसका स्कूटर फिसल गया और वो गिर पड़ी। मैंने तुरंत मदद की। उसका साड़ी का पल्लू खिसक गया था और उसके बड़े-बड़े स्तन साफ दिख रहे थे। ब्रा के अंदर से उसके निप्पल्स का आकार साफ नजर आ रहा था। मैंने उसे उठाया और उसके फ्लैट तक छोड़ा। वो धन्यवाद बोल रही थी लेकिन उसकी आँखों में कुछ और ही चमक थी।
उस रात मुझे नींद नहीं आई। अगले दिन अक्षरा ने मुझे चाय पीने बुलाया। उसके फ्लैट में अकेले हम दोनों थे। वो किचन में चाय बना रही थी और मैं सोफे पर बैठा था। उसने टाइट टी-शर्ट पहनी हुई थी जिससे उसके स्तन उभर कर आ रहे थे। बातें करते-करते वो मेरे पास आ गई और अचानक बोली, “नितिक, तुम्हारी नजरें मुझे नंगी कर देती हैं।” मैं घबरा गया लेकिन फिर साहस करके बोला, “अक्षरा, तुम्हारी चूत की खुशबू मुझे दीवाना बना रही है।”
उसने तुरंत मेरे मुँह पर हाथ रखा और कहा, “चुप, पति बाहर है। आज तुम मुझे चोदो।” हम दोनों बेडरूम में चले गए। अक्षरा ने अपनी टी-शर्ट उतारी। उसके ब्रा के अंदर से ३६ साइज के मोटे-मोटे स्तन झूल रहे थे। निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने उन्हें हाथों में लिया और जोर से दबाया। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… नितिक, मेरे स्तनों को चूसो, काटो!” मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और चूसने लगा। दूसरा हाथ उसकी सलवार में घुसा दिया। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। उंगलियाँ अंदर डाली तो गरम-गरम रस निकल रहा था।
अक्षरा ने मेरी पैंट उतारी। मेरा लंड ७ इंच का खड़ा हो चुका था, मोटा और नसों से भरा। वो बोली, “वाह, कितना बड़ा लंड है! आज मेरी चूत फाड़ दो।” उसने घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड मुँह में लिया। जीभ से चाटते हुए पूरा अंदर ले गई। “उम्म्म… स्वाद कितना अच्छा है नितिक।” वो चूस रही थी और मैं उसके बाल पकड़कर आगे-पीछे कर रहा था। थूक से लंड चमक रहा था।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। सलवार और पैंटी उतार दी। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, होंठ मोटे और गुलाबी, अंदर से गुलाबी मांस दिख रहा था। रस टपक रहा था। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी और चाटने लगा। “आह्ह्ह… नितिक, चूत चूसो, क्लिट को काटो!” वो चीख रही थी। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं और तेजी से आंदोलन किया। अक्षरा का शरीर काँप रहा था। “मेरा पानी निकाल दो!” उसकी चूत से गरम-गरम रस निकला और मेरे मुँह पर छिटक गया।
अब वो बोली, “अब अपना लंड अंदर डालो।” मैंने उसके पैर फैलाए और लंड की नोक चूत के मुंह पर रखी। धीरे से दबाया। “आह्ह्ह…

धीरे, फट रही है!” लेकिन फिर जोर लगाया। आधा लंड अंदर घुस गया। अक्षरा की आँखें बंद हो गईं। मैंने पूरा लंड एक झटके में अंदर घुसा दिया। “उफ्फ्फ… नितिक, तुमने मेरी चूत फाड़ दी!” अब मैं तेजी से चोदने लगा। “थप-थप” की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं झुककर उन्हें चूस रहा था।
अक्षरा बोली, “मेरी गान्ड भी मारो।” मैंने लंड निकाला, थूक लगाया और गान्ड के छेद पर रखा। धीरे से दबाया। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है!” लेकिन फिर पूरा लंड गान्ड में घुस गया। अब मैं गान्ड मार रहा था और उंगलियों से चूत रगड़ रहा था। अक्षरा चीख रही थी, “चोदो मुझे, दोनों छेद भर दो!”
हमने घंटों तक चोदा। पोजीशन बदलते रहे। डॉगी स्टाइल में मैं पीछे से चोद रहा था, उसके बाल पकड़कर। “ले, मेरी रंडी, ले लंड!” वो बोल रही थी, “हाँ, और जोर से, मेरी चूत का मालिक बन जा!” आखिर में मैंने उसके स्तनों पर झड़ दिया। गरम-गरम वीर्य उसकी गोरी छाती पर फैल गया।
ये हमारी पहली मुलाकात थी। उसके बाद कई बार मिले। अक्षरा अब मेरी नियमित चूदक्कड़ बन गई है। उसका पति जब बाहर होता है, वो मुझे बुलाती है और हम पूरी रात चोदते रहते हैं। उसकी चूत, गान्ड, स्तन सब मेरे हो चुके हैं। ये मेरी असली जिंदगी की कहानी है, अक्षरा नितिक रियल लाइफ की।
(कहानी को और विस्तार से सोचते हुए, अगली मुलाकात में हमने किचन में चोदा, जहां अक्षरा ने मुझे खाना खिलाते हुए लंड चूसा, फिर टेबल पर लेटकर चूत दी। बारिश के दिन बालकनी में नंगे होकर चोदा, जहां पानी गिर रहा था और हमारा पसीना मिल रहा था। हर बार वो नई-नई गंदी बातें करती, “नितिक, आज मेरी चूत में अपना मूत्र डाल दो” लेकिन मैंने लंड से ही भरा। उसके शरीर की हर रेखा, हर छेद मैंने चखा। लंड की नसें जब उसकी चूत की दीवारों से रगड़तीं तो दोनों को मज़ा आता। वीर्य निकलने के बाद भी लंड अंदर रखकर सो जाते। सुबह फिर चाय के साथ नई राउंड। ये सिलसिला अभी भी चल रहा है। दिल्ली की गर्मी में पंखे के नीचे नंगे लेटे, एक-दूसरे के शरीर को सहलाते हुए बातें करते कि अगली बार क्या नया ट्राई करेंगे। अक्षरा की चूत हमेशा मेरे लिए तैयार रहती है, गीली और भूखी।)