
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिक है। मैं दिल्ली में रहता हूं और एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूं। मेरी उम्र 32 साल है और मैं काफी फिट हूं। आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाने जा रहा हूं जो मेरी पड़ोस वाली अक्षरा के साथ हुई। अक्षरा मेरी उम्र की है, 30 साल की, शादीशुदा लेकिन उसके पति अक्सर बाहर रहते हैं। वो बहुत खूबसूरत है, गोरी चमड़ी, बड़ी-बड़ी आंखें, मोटे होंठ और सबसे खास बात उसकी भारी भरी छाती और गोल गोल गांड। जब वो चलती है तो उसकी गांड हिलती हुई लगती है।
एक दिन शाम को बारिश हो रही थी। मैं अपने फ्लैट में अकेला था। अक्षरा ने दरवाजा खटखटाया। वो रो रही थी। उसके आंसू बह रहे थे। उसने कहा, "नितिक भाई, प्लीज अंदर आने दो। पति से लड़ाई हो गई।" मैंने उसे अंदर बुलाया। वो भीगी हुई थी, उसकी साड़ी उसके शरीर से चिपक गई थी। उसके स्तन साफ दिख रहे थे, निप्पल्स उभरे हुए। मैंने उसे तौलिया दिया और चाय बनाई। वो रो रही थी, आंसू गिरा रही थी। मैंने उसे कंसोल किया, "अक्षरा, सब ठीक हो जाएगा।"
लेकिन जैसे ही मैं उसके पास बैठा, कुछ और ही होने लगा। उसकी सांस तेज हो गई। उसने मेरी तरफ देखा और कहा, "नितिक, आज मुझे कुछ चाहिए। मुझे भूलना है सब कुछ।" उसने अपना सर मेरे कंधे पर रखा। मैंने उसके बालों में हाथ फेरा। फिर धीरे से उसके होंठों को छुआ। वो रो रही थी लेकिन अब वो सिसकियां ले रही थी। मैंने उसे किस किया, गहरी किस। उसकी जुबान मेरी जुबान से लिपट गई।
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया। उसकी ब्लाउज में भरे हुए स्तन बाहर आने को बेताब थे। मैंने ब्लाउज के हुक खोले। उसके स्तन झूल गए, बड़े, गोल, निप्पल्स काले और सख्त। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसा। अक्षरा चीख पड़ी, "आह्ह्ह नितिक, जोर से चूसो।" वो अभी भी आंसू बहा रही थी। मैंने दूसरा स्तन दबाया, निचोड़ा। दूध जैसा रस नहीं लेकिन पसीना और उसकी गर्माहट।
फिर मैंने उसकी साड़ी पूरी उतारी। वो सिर्फ पेटीकोट में थी। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोला। उसकी चूत सामने थी, बालों वाली, गीली। मैंने उंगली डाली। वो चीखी, "उफ्फ्फ, मेरी चूत जल रही है।" मैंने उंगली अंदर बाहर की, उसका रस बह रहा था। अक्षरा रो रही थी, "नितिक, मुझे चोदो। आज मुझे जोर से चोदो।"
मैंने अपना लंड निकाला। वो 7 इंच का मोटा लंड था, नसें उभरी हुई। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और मूंह में डाल लिया। वो चूस रही थी, जीभ से चाट रही थी। आंसू उसके गालों से गिर रहे थे। मैंने उसके बाल पकड़े और मुंह में ठोकने लगा। "ले ले रंडी, मेरा लंड चूस।" वो गले तक ले रही थी।
फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत खुल गई, गुलाबी अंदर, रस टपक रहा था। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। अक्षरा रो रही थी, "डाल दो, फाड़ दो मेरी चूत।" मैंने एक जोर का झटका मारा। लंड आधा अंदर गया। वो चीखी, "आह्ह्ह मर गई।" मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर। अब मैं धीरे धीरे चोदने लगा।
हर धक्के पर अक्षरा रो रही थी, "नितिक, और जोर से। मेरी चूत फट रही है।" मैंने उसकी गांड थपथपाई, लाल-लाल निशान पड़ गए। फिर पोजीशन बदली। उसने घोड़ी बनकर घुटनों के बल बैठी। मैंने पीछे से लंड डाला। उसकी गांड के चीरे में उंगली डाली। वो सिसक रही थी। "नितिक, मेरी गांड भी मारो।" लेकिन पहले चूत ही चोदता रहा।
लंबे समय तक चोदा। पसीना बह रहा था। उसका शरीर कांप रहा था। आखिर में वो झड़ गई, चूत से रस निकला। मैंने भी उसके अंदर झड़ दिया, गरम माल भर दिया। अक्षरा रो रही थी लेकिन अब खुशी के आंसू।
हम दोनों थक गए। लेकिन रात भर चोदा। सुबह तक उसकी चूत लाल हो गई थी। वो बार-बार बोल रही थी, "नितिक, तू मेरा असली मर्द है।"
(यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। अगली बार और डिटेल में बताऊंगा लेकिन फिलहाल इतना ही। अक्षरा अब अक्सर आती है और हमारी चुदाई चलती रहती है। उसकी रोने वाली सेक्स सबसे हॉट है।)