
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली से हूँ और एक कंपनी में सेल्समैन का काम करता हूँ। रोज़ गाँव-गाँव घूमकर प्रोडक्ट बेचना मेरी जिंदगी है। पिछले महीने मुझे राजस्थान के एक छोटे से देहाती इलाके में जाना पड़ा। वहाँ गर्मी थी, धूल भरी सड़कें और हवा में मिट्टी की खुशबू। मैं स्कूटर पर घूम रहा था जब एक छोटे से घर के बाहर एक औरत खड़ी थी। वो बिल्कुल देहाती स्टाइल में साड़ी पहने हुई थी, कमर तक बाल, गोरी चमड़ी पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। उसकी छाती पर साड़ी का पल्लू फिसल रहा था और उसकी भारी-भारी मोटी छातियाँ साफ दिख रही थीं। नाम था उसका मीरा भाभी। पति शहर में काम करते थे, वो अकेली रहती थी।
मैंने नमस्ते करके अपना प्रोडक्ट दिखाया। वो मुस्कुराई और अंदर बुला लिया। घर छोटा था, एक कमरा, रसोई और बाहर आंगन। मीरा भाभी ने मुझे पानी पिलाया। उसकी आवाज़ नरम थी, लेकिन आँखों में कुछ शरारत थी। हम बातें करने लगे। वो कहने लगी कि पति महीनों नहीं आते, गाँव की जिंदगी कितनी उबाऊ है। मैंने भी अपनी जिंदगी के किस्से सुनाए। धीरे-धीरे बातें रोमांटिक होने लगीं। वो मेरे पास बैठ गई। उसकी साड़ी की बाँह से उसकी गोरी बाँह छू रही थी। मैंने हिम्मत करके उसके हाथ पर हाथ रख दिया। वो रुक नहीं गई।
“राहुल, तुम बहुत अच्छे लगते हो,” वो बोली। मैंने जवाब दिया, “भाभी, आप तो और भी खूबसूरत हो।” फिर क्या था, वो मेरी तरफ झुकी। मैंने उसकी कमर पकड़ ली। उसकी साँस तेज हो गई। मैंने उसके होठों पर अपने होठ रख दिए। वो भी चूमने लगी। जीभ से जीभ लड़ने लगी। उसका मुँह मीठा था। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। उसकी छातियाँ बाहर आ गईं। काले ब्रा में बंद मोटी, गोल छातियाँ, निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने ब्रा उतारी और एक चूची मुंह में ले ली। चूसने लगा जोर-जोर से। भाभी सिसकारियाँ भरने लगी, “आह्ह्ह राहुल, चूसो ना, मेरी चूचियाँ खा लो।”
मैंने दूसरी चूची भी चूसी। उसकी साड़ी नीचे सरक गई। अब वो सिर्फ पेटीकोट में थी। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोला। उसकी नंगी देह सामने थी। देहाती भाभी की मोटी जांघें, गोल-गोल गाँड और बीच में चिकनी सी चूत। बाल कटे हुए थे, लेकिन थोड़े-थोड़े बाल बचे थे। चूत के होंठ फूले हुए और रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली। भाभी चीख पड़ी, “हाँ, उंगली डालो, मेरी गीली चूत में।” मैंने दो उंगलियाँ घुसा दीं और अंदर-बाहर करने लगा। भाभी की कमर हिलने लगी।
फिर मैंने अपना लंड निकाला। वो मोटा, सात इंच का, नसें उभरी हुई और सिरा लाल। भाभी की आँखें फट गईं। “कितना बड़ा लंड है तुम्हारा!” वो बोली और झुककर चूसने लगी। उसकी गर्म साँस, जीभ से लंड चाटना, मुँह में पूरा लेना। वो गले तक ले जा रही थी। “थूक लगा के चूसो भाभी,” मैंने कहा। वो थूक लगाकर जोर-जोर से चूसने लगी। मेरे अंडे भी चाट रही थी।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसकी टाँगें फैलाईं। चूत चाटने लगा। जीभ से चूत के फूल चूसना, क्लिट को काटना, अंदर जीभ डालना। भाभी चीख रही थी, “आह्ह्ह्ह, चाटो मेरी चूत, रस पी लो!” उसका रस निकल रहा था। मैंने पूरा चाट लिया। फिर लंड चूत पर रखा। सिरा घुसाया। भाभी चीखी, “धीरे से, मेरा पति छोटा है।” लेकिन मैंने जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। चूत गर्म और तंग थी। धीरे-धीरे पूरा लंड घुसा दिया। भाभी की आँखों से आँसू आ गए लेकिन वो बोली, “चोदो मुझे, पूरी तरह चोदो!”
मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। लंड अंदर-बाहर, थप-थप की आवाज़। भाभी की छातियाँ उछल रही थीं। मैंने उनको पकड़कर दबाया। “ले भाभी, मेरा लंड ले, तेरी चूत फाड़ दूँगा,” मैं गंदी बातें कर रहा था। भाभी भी बोल रही थी, “हाँ, चोद, मेरी चूत का पानी निकाल दे, मैं तेरी रंडी हूँ आज!” हम दोनों पसीने से तर हो गए। मैंने पोजीशन बदली। भाभी को कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। गाँड ऊपर, चूत पीछे से। लंड पीछे से घुसाया। एक हाथ से गाँड थपथपाता, दूसरा बाल पकड़कर खींचता। भाभी चीख रही थी, “आह्ह्ह, गाँड भी मारो अगर मन करे!”
मैंने गाँड में उंगली डाली। भाभी का शरीर काँप रहा था। फिर मैंने लंड निकालकर गाँड पर रखा। “नहीं, पहले चूत में ही,” वो बोली लेकिन मैंने थोड़ा दबाव डाला। गाँड तंग थी। आधा लंड गाँड में घुसा। भाभी दर्द से चीखी लेकिन फिर मजे लेने लगी। “दोनों छेद भर दो,” वो बोली। मैंने बारी-बारी से चूत और गाँड मारी।
हम घंटों चोदते रहे। पहला झड़ना भाभी का हुआ। वो चीखी, “आ गया, मेरा पानी निकल गया!” चूत से रस फूटा। मैंने भी अंदर झड़ने लगा। गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया। भाभी ने सब चाट लिया। थोड़ी देर बाद फिर शुरू किया। इस बार भाभी ऊपर चढ़ी। मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी छातियाँ मेरे मुंह में। हम दोनों थक गए लेकिन मजे में। रात भर चला। सुबह वो बोली, “तुम फिर आना, मेरा सेल्समैन।”
ये मेरी देहाती भाभी की कहानी है। अब भी याद आती है तो लंड खड़ा हो जाता है।