नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं जयपुर में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी २८ साल है और मैं एक प्राइवेट ऑफिस में जॉब करता हूँ। लेकिन आज जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो मेरी जिंदगी का सबसे गंदा और मजेदार वाकया है। सब कुछ शुरू हुआ निम्बाराम देवासी के भजन सुनते-सुनते।
निम्बाराम देवासी हमारे मोहल्ले के मंदिर में भजन गाते हैं। उम्र उनके करीब ५५ साल, लेकिन आवाज में इतनी मिठास कि औरतें पिघल जाती हैं। खासकर मेरी चाची अनीता। अनीता चाची ३८ साल की हैं, गोरी, मोटी-तगड़ी, भारी भारी स्तन और चौड़ी कमर वाली औरत। उनके पति मेरे चाचा अक्सर बाहर रहते हैं बिजनेस के सिलसिले में। चाची अक्सर शाम को मंदिर जातीं निम्बाराम देवासी के भजन सुनने।
एक शाम मैं भी चाची के साथ गया। मंदिर में अंधेरा था, सिर्फ दीये जल रहे थे। निम्बाराम देवासी भजन गा रहे थे – “राम नाम रस पीजो रे…” उनकी आवाज में कुछ अजीब सी गर्माहट थी। चाची उनके पास बैठी हुई थीं, आँखें बंद किए, शरीर हिलाते हुए। मैंने देखा चाची की साड़ी थोड़ी खिसक गई थी, उनकी गोरी जांघें नजर आ रही थीं। मेरा लंड खड़ा हो गया।
घर लौटते वक्त चाची ने कहा, “राहुल, निम्बाराम देवासी के भजन सुनकर मन शांत हो जाता है। तू भी साथ आया कर।” मैंने हाँ कर दी। अगले दिन शाम को फिर वही सीन। भजन चल रहे थे, चाची पास बैठी, इस बार मैंने देखा कि निम्बाराम देवासी चाची की तरफ देख रहे थे और उनकी नजरें चाची के बड़े-बड़े स्तनों पर टिकी थीं।
घर आकर चाची ने पूछा, “राहुल, तुझे भजन अच्छे लगे?” मैंने कहा, “हाँ चाची, लेकिन आपकी वजह से और भी।” चाची हँसीं और बोलीं, “शरारती लड़का।” रात को मैं सो नहीं पाया। कल्पना कर रहा था कि चाची निम्बाराम देवासी के भजन गाते-गाते कैसे चूत में उंगली डालकर मस्ती कर रही होंगी।
दूसरे दिन चाची ने मुझे अकेले बुलाया। “राहुल, आज मंदिर नहीं जाना। घर पर ही भजन सुनते हैं।” उन्होंने कैसेट लगा दी निम्बाराम देवासी की। भजन शुरू हुए। चाची साड़ी में थीं, मैं सोफे पर बैठा। अचानक चाची ने कहा, “राहुल, मेरी पीठ दर्द कर रही है, तू मालिश कर दे।” मैं पीछे बैठ गया। हाथ लगाते ही चाची का शरीर काँप गया।
मैंने साड़ी ऊपर खिसकाई। उनकी कमर नंगी थी। हाथ फेरते-फेरते मैंने उनके स्तनों को छुआ। चाची ने आह भरी, “आह… राहुल, क्या कर रहा है?” लेकिन रोका नहीं। मैंने आगे बढ़कर उनके स्तन दबाए। भारी, मुलायम, निप्पल सख्त। चाची ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया। “छू ले बेटा, तेरी चाची की गर्म चूत।”
भजन अभी भी चल रहे थे – “प्रभु जी का नाम लो…” चाची ने साड़ी उतार दी। पूरा शरीर नंगा। बड़ी-बड़ी गांड, घनी जांघें, चूत के बाल काले-काले। मैंने भी कपड़े उतारे। मेरा लंड खड़ा, ८ इंच का मोटा। चाची ने लंड पकड़ लिया, “कितना बड़ा है तेरा लंड, चाची की चूत फाड़ देगा।”
उन्होंने मेरा लंड मुंह में लिया। चूसने लगीं, जीभ से लंड चाटते हुए। “उम्म… मम्म…” आवाजें निकल रही थीं। भजन की आवाज में मिलकर और भी उत्तेजक लग रही थीं। मैंने चाची की चूत चाटी। रस बह रहा था, मीठा-खट्टा। चाची चीख रही थीं, “चाट ले राहुल, चाची की चूत का रस पी ले। निम्बाराम देवासी के भजन सुनते-सुनते चाची को चोद।”
मैंने लंड चूत में डाला। एक ही झटके में आधा अंदर। चाची चीख पड़ीं, “आह… फट गई मेरी चूत!” मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “थप थप” की आवाजें। स्तन दबाते, गांड थपथपाते। चाची बोल रही थीं, “जोर से चोद, तेरी चाची को मालूम है तू कितने दिनों से देख रहा था। निम्बाराम देवासी के भजन में ही चाची की चूत गीली हो जाती है।”
हमने पोजीशन बदली। चाची ऊपर आईं, लंड पर बैठ गईं। गांड हिलाते हुए चोदने लगीं। “ले ले चाची का वजन, लंड अंदर तक घुसा ले।” रस बह रहा था, मेरे लंड पर चमक रहा था। मैंने चाची की गांड में उंगली डाली। “आह…

गांड भी चोद ले बेटा।”
हम घंटों चोदते रहे। भजन खत्म हो चुके थे लेकिन हम रुक नहीं रहे थे। चाची ने मेरा लंड निकालकर गांड में डालने को कहा। “गांड मार, चाची की गांड फाड़ दे।” लंड गांड में घुसा, तंग और गर्म। चाची चीख रही थीं, “दर्द हो रहा है लेकिन मजा आ रहा है।”
आखिर में मैं झड़ गया चाची की चूत में। गरम-गरम माल अंदर भर दिया। चाची बोलीं, “अब निम्बाराम देवासी के भजन सुनते हुए ही चोदेंगे रोज।”
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