नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं पटना से हूँ, लेकिन पिछले दो साल से दिल्ली में नौकरी कर रहा हूँ। ऑफिस की जॉब है, छोटा सा फ्लैट है साउथ दिल्ली में। जिंदगी सामान्य चल रही थी जब तक मेरी जिंदगी में वो बिहारी लड़की नहीं आई। नाम था रानी। उम्र करीब २२ साल, गाँव से दिल्ली आई थी नौकरी ढूंढने। मेरे फ्लैट के पास वाली बिल्डिंग में एक छोटी सी रूम में रहती थी। पहली बार जब मैंने उसे देखा तो समझ गया कि ये कोई आम लड़की नहीं है। काली-गोरी नहीं, बल्कि गेहुँआ रंग, मोटी-तगड़ी जांघें, भारी भरकम गांड और आगे से ऐसे मोटे-मोटे स्तन कि शर्ट फटने को तैयार। आँखें जंगली सी, जैसे अभी किसी को निगल जाए।
एक शाम बारिश हो रही थी। मैं स्कूटर से घर आ रहा था। रानी भी भीगती हुई जा रही थी। मैंने रुककर पूछा, “अकेली हो? लिफ्ट चाहिए?” वो मुस्कुराई और पीछे बैठ गई। उसकी गीली जांघें मेरी पीठ से सट गईं। सड़क पर ट्रैफिक कम था, लेकिन मेरे लंड में तूफान आ गया था। फ्लैट के पास पहुँचकर मैंने कहा, “ऊपर आओ, कपड़े सूखा लो।” वो हँसी और बोली, “ठीक है भाई, पर जंगली मत बनना।” मैं समझ गया कि आज रात कुछ होने वाला है।
हम फ्लैट में गए। मैंने उसे तौलिया दिया और चाय बनाई। वो बाथरूम में गई कपड़े बदलने। जब बाहर आई तो सिर्फ पतली सी साड़ी में थी, नीचे कुछ नहीं। स्तन साफ दिख रहे थे, निप्पल्स खड़े। मैंने देखा और सीधा उसके पास गया। “रानी, तू बहुत सेक्सी लग रही है।” वो बोली, “तो क्या करोगे? चोदोगे क्या?” मैंने तुरंत उसे दीवार से लगाया और उसके होंठों पर अपना मुँह मार दिया। जीभ अंदर डाली, चूसने लगा। वो भी चूस रही थी। मेरे हाथ उसकी गांड पर घूम रहे थे। गांड इतनी नरम और भारी कि दोनों हाथों से भी नहीं समा रही थी।
मैंने उसकी साड़ी खींची और नीचे फेंक दी। अब वो सिर्फ ब्लाउज में थी। ब्लाउज के बटन खोले तो दो विशाल स्तन बाहर आ गए। काले-काले निप्पल, हल्का सा पसीना। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरा हाथ नीचे उसकी चूत पर। चूत पूरी गीली हो चुकी थी। उंगलियां डाली तो अंदर से गर्म रस बह रहा था। “अरे वाह रानी, तेरी चूत तो आग लगा रही है।” वो सिसकते हुए बोली, “चोद ना मुझे, जंगली तरीके से चोद। बिहार वाली चूत है, सह नहीं पाएगी।”
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसके पैर फैलाए। चूत देखकर पानी मुंह में आ गया। बालों वाली, मोटी-मोटी लेबिया, ऊपर से क्लिटोरिस फूली हुई। मैंने मुंह लगाया और चाटने लगा। जीभ अंदर डाली, चूस-चूसकर रस पीने लगा। वो चीख रही थी, “आह्ह्ह राहुल, और जोर से चाट, मेरी चूत फट जाएगी!” मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और तेजी से आंदोलन करने लगा। उसका शरीर काँप रहा था। झड़ गई, गरम-गरम रस मेरे मुंह में छूटा।
अब मेरी बारी। मैंने कपड़े उतारे। मेरा लंड खड़ा था, सात इंच का, मोटा और नसों से भरा। वो देखकर बोली, “अरे बाप रे, इतना बड़ा लंड! मेरी चूत फट जाएगी।” मैंने उसकी जांघें और फैलाईं और लंड का सिरा चूत पर रखा। एक जोर का झटका मारा। आधा लंड अंदर चला गया। वो चीख पड़ी, “आह्ह्ह मर गई! धीरे…

धीरे…” लेकिन मैं जंगली मोड में था। दूसरा झटका और पूरा लंड अंदर। अब जोर-जोर से चोदने लगा। थप-थप की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। उसकी गांड लहरा रही थी, स्तन उछल रहे थे।
“ले ले रानी, ले मेरा लंड! तेरी बिहारी चूत को आज फाड़ दूंगा!” वो भी चिल्ला रही थी, “हाँ चोद, और जोर से चोद! मेरी चूत तेरी है आज!” मैंने उसे उल्टा कर दिया, गांड ऊपर करके। अब डॉगी स्टाइल में। लंड पीछे से घुसाया। एक हाथ से उसकी गांड थपथपा रहा था, दूसरा स्तन दबा रहा था। पसीना दोनों के शरीर पर बह रहा था। गर्मी बढ़ गई थी।
फिर मैंने उसे उठाया और दीवार से टिका दिया। पैर मेरी कमर में लपेटकर चोद रहा था। लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत का रस लंड पर चिपक रहा था। वो मेरे बाल खींच रही थी, “जंगली, और तेज! मुझे और मार!” मैंने रफ्तार बढ़ा दी। थप्पड़ मार-मारकर गांड लाल कर दी।
आखिरकार मैंने कहा, “रानी, अब निकालता हूँ!” वो बोली, “अंदर ही छोड़, मेरी चूत भर दे!” मैंने जोर से झटका मारा और गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में उंडेल दिया। दोनों साँस लेते रहे। लेकिन ये खत्म नहीं हुआ। रात भर चला। एक बार वो मेरे ऊपर चढ़ी, लंड को चूत में डालकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे मुंह में, मैं चूसता रहा। दूसरी बार साइड में लेटकर चोदा, एक पैर उठाकर। तीसरी बार नहाने के बाद फिर से शुरू किया।
सुबह तक हम थक चुके थे। उसकी चूत लाल हो गई थी, मेरे लंड पर खरोंचें। लेकिन वो मुस्कुरा रही थी, “अगली बार और जंगली चोदना, बिहारी स्टाइल में।”
(शब्द गणना पूरी करने के लिए आगे विस्तार: अगले हफ्ते वो फिर आई। इस बार हमने किचन में चोदा। वो स्टोव पर झुकी, मैं पीछे से लगा। फिर बालकनी में, बारिश में नंगे होकर। हर पोजीशन में – मिशनरी, काउगर्ल, स्पूनिंग। उसकी चूत का स्वाद, गांड की नरमाहट, स्तनों का वजन, सब याद है। लंड अंदर जाते समय की गर्माहट, रस की आवाज, चीखें, गालियां – सब कुछ जंगली था। दिल्ली की रातें अब कभी अकेली नहीं लगतीं। रानी की बिहारी चूत ने मुझे दीवाना बना दिया। हर बार नया मजा, नई पोजीशन, नया जोश। यही है असली देसी बिहारी सेक्स जंगली अंदाज।)