नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक छोटे से फ्लैट में अकेला रहता हूँ। ऑफिस की जॉब है, शाम को घर आकर टीवी देखना मेरा रोज का शौक है। खासकर भारतीय सीरियल्स। अक्षरा नाम की एक सीरियल मुझे बहुत पसंद है। ११ फरवरी २०१८ से लेकर अब तक के सारे एपिसोड्स मैंने देखे हैं। हर एपिसोड में अक्षरा की वो अदाएं, उसकी बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे स्तन जो ब्लाउज में फिट नहीं होते, और वो पतली कमर… मन में गंदे ख्याल आने लगते।
एक दिन रात को अकेले फ्लैट में लेटा हुआ था। टीवी पर अक्षरा का नया एपिसोड चल रहा था। स्क्रीन पर वो साड़ी में खड़ी थी, पल्लू गिरा हुआ, गोरे स्तन का ऊपरी हिस्सा दिख रहा था। मेरे लंड में हलचल हुई। मैंने पैंट उतारी और लंड को हाथ में लिया। धीरे-धीरे मसलने लगा। अक्षरा की आवाज सुनकर लग रहा था जैसे वो मेरे सामने खड़ी होकर बोल रही हो, “राहुल, मेरी चूत देखो कितनी गीली है।”
मैंने कल्पना की कि अक्षरा मेरे फ्लैट में आ गई। दरवाजा खटखटाया। मैंने खोला तो वो अंदर घुसी, साड़ी थोड़ी गीली बारिश से। “राहुल, आज रात मुझे चोदो,” वो बोली। मैंने उसे दीवार से लगाया और उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। जीभ से उसकी जीभ चूसने लगा। वो सांस लेते हुए बोली, “अरे धीरे… मेरे स्तन दबाओ।” मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। दो बड़े, गोरे, मुलायम स्तन बाहर निकले। निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। चूचू की आवाज आ रही थी। अक्षरा चीख रही थी, “हाँ राहुल, मेरी चूचियाँ चूसो, काटो, मेरा दूध पी लो!”
मैंने दूसरा स्तन हाथ में लिया और जोर से निचोड़ा। दूध जैसा रस नहीं निकला लेकिन वो पसीने से तर हो गई। मैंने उसके पेट पर हाथ फेरा और नाभि में उंगली डाली। फिर नीचे उतरा। साड़ी का पल्लू हटाया। उसकी चूत पर हाथ रखा। चूत पूरी गीली थी। उंगलियाँ फिसल रही थीं। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं। अक्षरा की चूत गर्म और तंग थी। “आह्ह्ह… राहुल, उंगली मत निकालो, और गहराई तक डालो!” वो चिल्लाई। मैंने उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा। चूत से चिकना रस निकल रहा था। मैंने रस को चाटा। स्वाद नमकीन और मीठा था।
अब मैंने अपना लंड निकाला। लंड सात इंच का, मोटा, नसें फूल रही थीं। अक्षरा ने लंड देखकर कहा, “वाह, इतना बड़ा लंड! मेरी चूत फाड़ देगा।” मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। टाँगें फैलाईं। चूत का मुंह खुला हुआ था, गुलाबी अंदरूनी हिस्सा दिख रहा था। मैंने लंड का सिरा चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाया। लंड आधा अंदर गया। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है! पूरा डाल दो!” मैंने जोर लगाया। पूरा लंड चूत में घुस गया। चूत की दीवारें लंड को कस रही थीं।
मैंने चोदना शुरू किया। धक्के मारते हुए बोला, “ले अक्षरा, मेरा लंड ले, तेरी चूत फाड़ दूंगा!” वो भी गंदी गंदी बातें करने लगी, “हाँ चोद मुझे, मेरी चूत का रस निकाल, तेरे लंड से मेरी चूत फट रही है!” हम दोनों पसीने से तर हो गए। लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत से “प्लच प्लच” की आवाज आ रही थी। मैंने उसकी टाँगें कंधों पर रखीं और और जोर से चोदने लगा। अक्षरा का शरीर काँप रहा था।
फिर मैंने पोजीशन बदली। उसे कुत्ते वाली पोजीशन में कराया। गोल-गोल गाँड मेरे सामने थी। मैंने गाँड के छेद पर उंगली घुमाई। “नहीं राहुल, गाँड मत मारो, चूत मारो!” वो बोली। लेकिन मैंने लंड गाँड में डाल दिया। गाँड तंग थी, लंड मुश्किल से घुसा। अक्षरा चीख रही थी, “आह्ह्ह…

गाँड फट रही है!” मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। गाँड का रस निकल रहा था।
हम घंटों चोदते रहे। हर पोजीशन में – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल। अक्षरा मेरे ऊपर चढ़कर लंड पर उछल रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों से पकड़कर निचोड़ा। आखिर में मैंने लंड बाहर निकाला और उसके स्तनों पर झड़ गया। गाढ़ा सफेद रस स्तनों पर फैल गया। अक्षरा ने रस को उंगलियों से लगाकर चाट लिया।
ये सपना रोज रात को आता है जब मैं अक्षरा सीरियल के एपिसोड्स देखता हूँ। २०१८ से अब तक के सारे एपिसोड्स में उसकी हर अद<|eos|>