नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम आदित्य है। मैं एक इंजीनियर हूं और पिछले साल राजस्थान के एक छोटे से गांव में प्रोजेक्ट के लिए गया था। वहां बिजली के काम के लिए हमारी टीम गई थी। गांव छोटा था, लेकिन वहां की हवा में कुछ खास था। एक दिन जब मैं नहर के किनारे बैठा ड्राइंग चेक कर रहा था, तभी मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी। उसका नाम राधा था। उम्र करीब बीस साल, गोरी चमड़ी, मोटी कमर, बड़े-बड़े स्तन जो उसकी पतली कमीज में से उभर रहे थे और गोल-गोल नितंब जो हर कदम पर हिल रहे थे। वह पानी भरने आई थी। हमारी नजरें मिलीं और कुछ ही दिनों में बातें शुरू हो गईं।
राधा गांव की सबसे सुंदर लड़की थी। उसकी आंखों में एक शरारत थी और जब वो हंसती तो उसके स्तन ऊपर-नीचे उछलते। धीरे-धीरे हम दोस्त बन गए। वो मुझे गांव घुमाती, खेतों में ले जाती। एक शाम बारिश शुरू हो गई। हम दोनों एक खेत के किनारे झोपड़ी में छुप गए। बारिश तेज हो रही थी। राधा भीग गई थी, उसकी कमीज उसके शरीर से चिपक गई थी। उसके स्तनों के काले निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने कहा, “राधा, तुम भीग गई हो।” वो शरमा गई लेकिन मुस्कुराई। “आदित्य भाई, तुम भी तो भीगे हो।”
मैंने हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ा। वो रुक गई। मैंने धीरे से उसे अपनी तरफ खींचा और उसके होठों पर अपना मुंह लगा दिया। पहले वो थोड़ी घबराई लेकिन फिर वो भी चूमने लगी। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी। मैंने उसके स्तनों को हाथ में लिया। कितने नरम और भारी थे! मैंने कमीज के ऊपर से ही दबाए। राधा कराह उठी, “आह्ह…

आदित्य, धीरे से।”
बारिश का शोर हमें और उत्तेजित कर रहा था। मैंने उसकी कमीज ऊपर की और ब्रा खोल दी। उसके स्तन बाहर आ गए, गोल-गोल, बड़े-बड़े, निप्पल कड़े हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। राधा के मुंह से आवाज निकली, “हम्म्म… चूसो ना… मेरा दूध पी लो।” मैं दूसरे स्तन को हाथ से दबा रहा था, उंगलियों से निप्पल को मसल रहा था। राधा का हाथ मेरे लंड पर चला गया। वो मेरे पैंट के ऊपर से ही दबाने लगी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, मोटा और लंबा।
“राधा, मेरा लंड पकड़,” मैंने कहा। उसने पैंट खोल दी और लंड बाहर निकाल लिया। “वाह, कितना बड़ा है! गांव के लड़कों का इतना मोटा नहीं होता।” वो मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर-नीचे करने लगी। लंड से प्री-कम निकल रहा था। राधा ने उसे चाट लिया। “स्वाद अच्छा है,” वो बोली और मुंह में ले लिया। उसकी गर्म सांस और जीभ ने मुझे पागल कर दिया। वो चूस रही थी, “चल… चूस… और गहराई तक ले।” मैं उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में धक्के मारने लगा।
फिर मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट खोल दिए। उसकी चूत साफ दिख रही थी, बाल कटे हुए, होंठ फूले हुए, रस बह रहा था। मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। राधा चीख उठी, “आह्ह्ह… आदित्य… चूत चाटो… जीभ अंदर डालो!” मैंने जीभ घुसा दी और चूसने लगा। उसका रस मीठा था। वो मेरे सिर को दबा रही थी अपनी जांघों के बीच। “और जोर से… मैं झड़ने वाली हूं!” वो झड़ गई, चूत से रस निकल आया।
अब वो बोली, “अब अपना लंड मेरी चूत में डालो। मुझे चोदो।” मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से धक्का मारा। लंड आधा अंदर चला गया। राधा चीखी, “अरे… दर्द हो रहा… धीरे!” लेकिन मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर घुस गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “राधा, तेरी चूत कितनी गर्म है!” “आदित्य, और जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दो!”
हम दोनों झोपड़ी के फर्श पर लेटे थे। मैं उसके ऊपर चढ़कर जोर-जोर से धक्के मार रहा था। उसके स्तन मेरे मुंह में थे। वो मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। “हां… हां… चोदो मुझे… गांव की लड़की को शहर वाले लंड से चोदो!” मैंने रफ्तार बढ़ा दी। “थप… थप…” की आवाज आ रही थी। राधा बार-बार झड़ रही थी।
फिर मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। उसकी गोल-गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड पीछे से डाला। अब और गहराई तक जा रहा था। “आह्ह… गहराई में… मेरी गांड भी मारो!” मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे और चोदता रहा। लंड से चूत का रस निकल रहा था।
हम घंटों चोदते रहे। बारिश रुक गई तो भी हम रुक नहीं रहे थे। आखिर में मैं उसके स्तनों पर झड़ गया। राधा ने सब चाट लिया।
उस रात के बाद कई रातें ऐसी ही गुजरीं। राधा अब खुलकर बोलती, “आदित्य, आज मेरी गांड मारना।” मैं उसकी गांड में लंड डालता, वो चीखती लेकिन मजा लेती। हम खेतों में, नहर किनारे, झोपड़ी में चोदते। उसकी चूत, गांड, मुंह सब मेरा हो गया था।
एक दिन प्रोजेक्ट खत्म होने वाला था। राधा रो पड़ी। “मत जाओ, मुझे छोड़कर मत जाओ।” मैंने कहा, “तुम्हें शहर ले जाऊंगा।” लेकिन वो गांव नहीं छोड़ना चाहती थी। आखिरी रात हमने पूरी रात चोदा। मैंने उसकी चूत में, गांड में, मुंह में सब जगह झड़कर उसे संतुष्ट किया।
अब भी जब याद आती है तो लंड खड़ा हो जाता है। राधा की वो गंदी बातें, “चोदो मुझे इंजीनियर साहब, अपनी गांव वाली चूत को फाड़ दो”… वो आवाजें आज भी कानों में गूंजती हैं।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती। राधा अब भी कभी-कभी शहर आती है और हम दोनों पुरानी यादों को ताजा करते हैं। उसकी चूत अब भी उतनी ही टाइट और गर्म है। हम घंटों तक चोदते हैं, वो मेरे लंड को चूसती है और मैं उसकी चूत चाटता हूं। गांव की वो रोमांचक रातें कभी भूल नहीं होतीं।)