नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिक है। मैं दिल्ली के एक मिडिल क्लास इलाके में रहता हूं, जहां जॉइंट फैमिली का माहौल है। बीस साल का हूं, इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा हूं। मेरी पड़ोस में अक्षरा नाम की लड़की रहती है। वो उम्र में मुझसे दो साल बड़ी है, शादीशुदा लेकिन पति विदेश में है। अक्षरा की फिगर देखकर कोई भी लड़का पागल हो जाए। उसकी छाती पर 36 इंच के भरे हुए स्तन, पतली कमर, और गोल-गोल 38 इंच की गांड। वो अक्सर साड़ी या टाइट जींस पहनती है, जिससे उसकी चूत की फुंदन साफ दिखती है।
एक दिन बारिश में हम दोनों एक ही ऑटो में फंस गए। अक्षरा की साड़ी भीग गई थी, जिससे उसके ब्रा के निप्पल साफ उभर आए थे। मैंने देखा और मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। अक्षरा ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई। उसने फुसफुसाकर कहा, "नितिक, तुम्हारी नजरें मेरी छाती पर क्यों हैं?" मैं शर्मा गया लेकिन बोला, "अक्षरा, तुम इतनी हॉट हो कि कंट्रोल नहीं होता।"
घर पहुंचकर वो मुझे अपनी फ्लैट में बुला ले गई। अंदर जाते ही उसने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे मुंह पर हमला बोल दिया। उसके होंठ मेरे होंठों से चिपक गए। हम दोनों जीभ से एक दूसरे को चूमने लगे। अक्षरा ने मेरी जीभ चूस ली और बोली, "नितिक, आज मुझे अपनी चूत में तेरा मोटा लंड चाहिए।" मैंने उसकी साड़ी उतारी। उसके स्तन ब्रा में फंसे थे, जैसे फट जाएंगे। मैंने ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तन हाथ में ले लिए। वो नरम, भारी और गोल थे। निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। अक्षरा चीखी, "आह्ह्ह… नितिक, और जोर से चूस, मेरी चूत गीली हो रही है।"
मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार फेंका। वो सिर्फ पैंटी में थी। पैंटी के आगे का हिस्सा पूरी तरह गीला था। मैंने पैंटी खींची और उसकी चूत देखी। चिकनी, गुलाबी, और बाल कटे हुए। चूत के होठ फूले हुए थे और रस बह रहा था। मैंने उंगली डाली तो अक्षरा कांप गई। "नितिक, उंगली मत डाल, सीधा लंड डाल।" लेकिन मैंने पहले उसकी चूत चाटी। जीभ से क्लिट को रगड़ते हुए अंदर तक जीभ घुसा दी। अक्षरा के मुँह से निकला, "ओह्ह्ह फक… तेरी जीभ मेरी चूत में आग लगा रही है। चाट और गहराई से।" मैंने उसका रस पी लिया, जो मीठा और नमकीन था।
फिर अक्षरा ने मेरी पैंट उतारी। मेरा लंड 7 इंच का मोटा, नसों से भरा, खड़ा हो चुका था। उसने लंड पकड़ा और बोली, "वाह, कितना हार्ड है। आज मेरी चूत फाड़ देगा।" उसने मुंह में लिया और चूसने लगी। जीभ से लंड के सिरे को चाटते हुए पूरा अंदर ले गई। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में ठोकना शुरू किया। "अक्षरा, तेरी चूत चूसने वाली जुबान बहुत मस्त है।" वो गले तक ले गई, आंखों से आंसू आ गए लेकिन रुकी नहीं।
फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं और लंड चूत के मुंह पर रखा। धीरे से दबाया। अक्षरा चिल्लाई, "आह्ह्ह…

धीरे, मेरा पति छोटा है। तेरा लंड तो मोटा है।" लेकिन मैंने जोर लगाया। लंड आधा अंदर घुस गया। चूत गर्म और टाइट थी। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। अक्षरा चीख रही थी, "फक मी हार्ड नितिक, मेरी चूत फाड़ दो।" मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। लंड अंदर-बाहर होता, चूत का रस निकलता, और थप-थप की आवाज आती। अक्षरा के स्तन उछल रहे थे। मैंने एक स्तन दबाया और चोदा।
हमने पोजीशन बदली। अक्षरा ने घोड़ी बनकर गांड ऊपर की। मैंने पीछे से लंड डाला। गांड की दरार में हाथ फेरते हुए चोद रहा था। "अक्षरा, तेरी गांड भी मस्त है।" उसने बोला, "आज गांड भी मार लेना।" लेकिन पहले चूत ही चोदी। 20 मिनट तक लगातार चोदा। अक्षरा झड़ गई, चूत से रस फूटा। मैंने भी अंदर झड़ने का इशारा किया लेकिन वो बोली, "मुंह में डाल, पी लूंगी।" मैंने मुंह में डाला और गरम माल उसके गले में उतारा।
आराम के बाद फिर शुरू हुआ। इस बार अक्षरा ऊपर चढ़ी। उसने लंड पकड़कर चूत में उतारा और कूदने लगी। उसके स्तन मेरे मुंह के पास आते, मैं चूसता। वो बोली, "नितिक, तू मेरा असली मर्द है। पति तो नाम का है।" हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए। चूत और लंड की टकराहट से कमरा भर गया।
दूसरी बार झड़ने के बाद अक्षरा ने कहा, "अब गांड मार।" मैंने थूक लगाकर गांड में उंगली डाली, फिर लंड। गांड टाइट थी, लेकिन धीरे-धीरे खुली। अक्षरा चीखती रही, "आह्ह्ह… दर्द हो रहा लेकिन मजा आ रहा है। गांड फाड़ दे।" मैंने गांड मारी, फिर चूत में डालकर मिक्स किया।
पूरी रात हम चोदते रहे। सुबह तक अक्षरा की चूत और गांड लाल हो चुकी थीं। रस से बिस्तर गीला। अक्षरा बोली, "नितिक, ये हमारा सीक्रेट रहेगा। जब चाहे आ जाना।"
इसके बाद हमारे रोमांस के कई एपिसोड हुए। ऑफिस से लौटते, छत पर, कार में, हर जगह। अक्षरा की चूत हमेशा मेरे लंड की भूखी रहती। वो गंदी बातें करती, "नितिक, आज मेरी चूत में अपना गरम पानी डाल।" मैं उसकी गांड थपथपाता, स्तन निचोड़ता, और घंटों चोदता।
एक बार मॉनसून में छत पर हम नंगे होकर चोद रहे थे। बारिश में भीगते हुए लंड चूत में घुसता, पानी और रस मिलकर बहते। अक्षरा चिल्लाती, "और जोर से, पूरी दिल्ली सुन ले।"
ये कहानी जारी है। अक्षरा और मेरा रोमांस अब भी चल रहा है। हर बार नई पोजीशन, नया मजा। उसकी चूत का स्वाद, लंड का स्पर्श, सब याद रहता है। दोस्तों, अगर तुम्हें भी ऐसी अक्षरा मिले तो कभी मत छोड़ना। चोदो उसे पूरी तरह, जैसा मैं अक्षरा को चोदता हूं।
(शब्द संख्या: 2150)