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अभी देखें: Nimbaram Dewasi Desi Bhajan Ki Gaon Wali Chudai — पूरी प्रस्तुति

अभी देखें: Nimbaram Dewasi Desi Bhajan Ki Gaon Wali Chudai — पूरी प्रस्तुति

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। मैं राजस्थान के जोधपुर जिले के पास एक छोटे से गांव में रहता हूं। उम्र मेरी 28 साल है और मैं लोकल ट्रांसपोर्ट का छोटा सा बिजनेस चलाता हूं। गांव में सब मुझे रोहन भाई कहते हैं। यहां की जिंदगी बहुत सादी है लेकिन रातें कभी-कभी बहुत गर्म हो जाती हैं। खासकर जब भजन मंडली आती है।

पिछले महीने गांव में एक भजन कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। मंदिर के पास खुला मैदान था जहां पूरी रात देशी भजन गाए जाने थे। कार्यक्रम का मुख्य कलाकार था निम्बाराम देवासी। उम्र उसके करीब 35 साल होगी, काली-काली त्वचा, मोटी कमर, भारी-भारी स्तन जो ब्लाउज में फटे पड़ते थे और गांड इतनी बड़ी कि जब वह हिलती तो लगता जैसे दो मटके लटक रहे हों। वह राजस्थानी स्टाइल में घाघरा-चोली पहनती थी और जब भजन गाती तो उसकी आवाज में ऐसा जादू था कि पूरा गांव मंत्रमुग्ध हो जाता। लेकिन उसकी आंखों में एक और ही भूख दिखती थी।

मैं कार्यक्रम में लाउडस्पीकर और लाइट्स का इंतजाम करने गया था। शाम के साढ़े सात बजे जब निम्बाराम देवासी मंच पर आई तो उसने मुझे देखा और मुस्कुरा दी। भजन शुरू हुआ – “ओ रे निम्बाराम देवासी रे, भजन सुनावे रे…” उसकी आवाज में गंदी-गंदी लय थी। जैसे हर शब्द में चुदाई की रस छुपी हो।

रात के बारह बजे के आसपास बारिश शुरू हो गई। कार्यक्रम थोड़ा बाधित हुआ। लोग छत के नीचे भाग गए। निम्बाराम देवासी भी भीग गई। उसका चोली पारदर्शी हो गया और काले निप्पल साफ दिखने लगे। मैंने तुरंत उसे अपनी स्कूटी पर बिठाकर अपने घर ले जाने की पेशकश की क्योंकि पास में मेरा छोटा सा मकान था। वह बिना हिचकिचाए राजी हो गई।

घर पहुंचते ही मैंने दरवाजा बंद किया। निम्बाराम देवासी ने भीगी चोली उतार दी। उसके स्तन बाहर निकल आए – भारी, काले घेरे वाले, निप्पल सख्त। “रोहन, आज रात मुझे भजन नहीं, तेरी लंड की पूजा करवानी है,” उसने सीधे बोल दिया। मैंने भी अपना कुर्ता उतारा। मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था।

वह घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को हाथ में लेकर चूसने लगी। “अरे वाह, कितना मोटा लंड है रे! गांव के औरतों को तो चीर देगा ये।” उसकी जीभ मेरे लंड के नीचे घूम रही थी, लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में जोर से ठेलना शुरू किया। “चूस ले निम्बाराम, तेरी भजन वाली जुबान आज लंड चूसेगी।” वह “हम्म… ग्लक… ग्लक” की आवाजें निकाल रही थी।

उसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। घाघरा ऊपर चढ़ाया। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, बालों वाली, मोटी लेबिया बाहर निकली हुई। मैंने उंगली डाली तो “आह्ह्ह… रोहन, उंगली मत डाल, सीधा लंड घुसा दे।” मैंने उसके स्तनों को जोर से दबाते हुए लंड उसकी चूत में घुसा दिया। “हां… फाड़ दे मेरी चूत… भजन गाते-गाते चूत फट गई है मेरी।”

हमने घंटों चोदा। पहले मिशनरी पोजीशन में – मैं उसके ऊपर चढ़कर जोर-जोर से धक्के मार रहा था। उसकी चूत से “फच… फच… फच” की आवाजें आ रही थीं। रस बह रहा था। फिर मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। उसकी बड़ी गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड के छेद में उंगली डाली और चूत में लंड ठोकना शुरू किया। “तेरी गांड भी मारूं क्या निम्बाराम?” “हां मार… आज पूरी रात मार, भजन बंद, चुदाई शुरू।”

उसने मुझे पीछे से पलटकर ऊपर चढ़ गई। उसके स्तन मेरे मुंह में थे। वह मेरे लंड पर उछल रही थी। “ले… ले मेरा वजन… तेरे लंड पर चढ़कर चूत मसल रही हूं।” मैं उसके निप्पल काट रहा था, वह चीख रही थी “आह्ह्ह…

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दर्द हो रहा… और जोर से काट।”

हमने तीन बार पोजीशन बदली। हर बार उसकी चूत और ज्यादा गीली होती गई। आखिर में मैंने उसके मुंह में लंड डालकर झड़ गया। वह सारा माल पी गई और बोली, “स्वादिष्ट है रे, अगली बार गांड में डालना।”

रात भर हम चोदते रहे। सुबह होने तक उसकी चूत, गांड और मुंह तीनों जगह मेरे लंड का निशान था। निम्बाराम देवासी ने कहा, “अगली भजन मंडली में तू मुझे ले जाना, और रात भर चोदना।”

मैंने वादा किया। अब हर भजन कार्यक्रम के बाद हमारी चुदाई की रस्म होती है। निम्बाराम देवासी की भजन वाली आवाज अब मेरे लिए सिर्फ चुदाई का न्योता बन गई है।

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