नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली के पुरानी दिल्ली इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी पैंतीस साल है और मैं एक छोटी सी म्यूजिक शॉप चलाता हूँ। दो साल पहले की बात है जब मेरी जिंदगी में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने मुझे पूरी तरह बदल दिया।
मेरे पास एक रेगुलर कस्टमर आती थी, नाम था देवी। उम्र उसके करीब अट्ठाईस साल। देवी मंदिर में भजन गाती थी और कभी-कभी मेरी शॉप में भजन की सीडी या म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट लेने आती। वो हमेशा सफेद या हल्के रंग की साड़ी में होती, बाल खुले, माथे पर चंदन का टीका। लेकिन उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी, जैसे वो भजन गाते-गाते भी कुछ और सोच रही हो।
एक शाम मॉनसून की बारिश हो रही थी। शॉप बंद करने का समय हो गया था। देवी अचानक आ गई। वो भीगी हुई साड़ी में थी, कपड़े शरीर से चिपक गए थे। उसके बड़े-बड़े स्तन साफ दिख रहे थे, निप्पल्स की आउटलाइन साड़ी से झलक रही थी। मैंने पूछा, “देवी जी, इतनी देर से क्या हुआ?”
उसने मुस्कुराते हुए कहा, “भजन की रिहर्सल चल रही थी, बारिश में फंस गई। थोड़ी देर बैठ जाऊँ?” मैंने दरवाजा बंद किया और अंदर बुलाया। हम दोनों अकेले थे।
बातें शुरू हुईं। देवी ने बताया कि वो भजन गाती है लेकिन अंदर से बहुत अकेली और भूखी है। “विक्रम, भजन तो गाती हूँ लेकिन शरीर में आग लगी रहती है। पति तो साल में एक बार आता है।” उसकी बात सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने हिम्मत करके पूछा, “तो क्या कभी किसी और से चुदवाया है?”
देवी ने सीधे मेरी तरफ देखा और बोली, “आज तक नहीं, लेकिन आज तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ।”
मैंने तुरंत उसे खींचा और उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। हम दोनों जोर-जोर से चूमने लगे। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस आई। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। उसके गोरे-गोरे स्तन बाहर निकल आए। बड़े-बड़े, भारी, निप्पल्स गुलाबी और खड़े। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। देवी चीख पड़ी, “आह्ह्ह विक्रम, चूसो मेरे मम्मे, जोर से काटो!”
मैंने उसके दूसरे स्तन को हाथ से दबाया और निप्पल को काट लिया। देवी का शरीर काँपने लगा। मैंने उसकी साड़ी पूरी उतार दी। नीचे वो पेटीकोट और ब्लाउज में थी। ब्लाउज के हुक खोले तो उसके स्तन आजाद हो गए। मैंने उन्हें दोनों हाथों से दबाया, निचोड़ा। दूध जैसा सफेद रंग, नरम लेकिन भारी।
देवी ने मेरी पैंट खोली। मेरा लंड बाहर निकल आया, सात इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुई, सिरा लाल और चमकदार। देवी ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना मोटा लंड है यार, आज तो मेरी चूत फट जाएगी।”
उसने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को मुंह में लिया। जीभ से चाटते हुए पूरा अंदर ले गई। “उम्म्म्म… स्लर्प स्लर्प” की आवाजें आने लगीं। वो जोर-जोर से चूस रही थी, लंड को गले तक ले जा रही थी। लार उसके मुंह से बहकर मेरे अंडों पर गिर रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर आगे-पीछे किया। “चूस देवी, मेरे लंड की रानी, और गहरा ले!”
दस मिनट चूसने के बाद मैंने उसे खड़ा किया। पेटीकोट का नाड़ा खोला। उसकी चूत सामने थी, गंजी, मोटी लेबिया, ऊपर से चमकदार रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली। “आह्ह्ह… उंगली मत डाल, सीधा लंड घुसा दे!” देवी चीखी।
मैंने उसे शॉप के काउंटर पर लिटाया। उसके पैर फैलाए और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। “डालो ना विक्रम, मेरी चूत प्यासी है!”
एक जोर का झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। देवी चीख पड़ी, “मर गई… मोटा है रे!” मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाला। उसकी चूत गरम, गीली और कसी हुई थी। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। “थप थप थप” की आवाजें। देवी के स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें दबाता, निप्पल खींचता और लंड अंदर-बाहर करता।
“चोदो मुझे विक्रम, देवी की चूत फाड़ दो! भजन गाती हूँ लेकिन आज रंडी बनकर चुद रही हूँ!” वो गंदी-गंदी बातें कर रही थी।
मैंने उसे उल्टा कर दिया। उसकी गोल-गोल गाँड सामने थी। मैंने गाँड के छेद पर लंड रखा और एक झटके में आधा अंदर घुसा दिया। देवी चीखी, “आह्ह्ह… गाँड मत मार, दर्द हो रहा!” लेकिन मैंने नहीं सुनी। पूरा लंड गाँड में डाल दिया। वो रोने लगी लेकिन फिर चीखने लगी, “और जोर से, मेरी गाँड फाड़ दो!”
मैंने उसकी गाँड मारते-मारते उसकी चूत में उंगली डाली। दो छेदों में एक साथ हमला। देवी का शरीर पसीने से तर हो गया। उसका रस मेरे हाथों पर बह रहा था।
हमने पोजीशन बदली। वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत में लंड डालकर वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे मुंह के सामने लटक रहे थे। मैं चूसता, काटता। “रस निकाल दो विक्रम, मेरी चूत का पानी पी लो!”
बीस मिनट बाद मैंने कहा, “देवी, अब मेरे मुँह में बैठ!” वो मेरे चेहरे पर बैठ गई। उसकी चूत मेरे मुंह पर। मैंने जीभ से उसकी चूत चाटी, क्लिट को चूसा। देवी चीख रही थी, “चाटो मेरी चूत, और गहरा! आह्ह्ह…

मैं झड़ रही हूँ!”
उसका गरम-गरम रस मेरे मुंह में आया। मैंने सब पी लिया।
फिर मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में डाला। पीछे से लंड घुसाया और जोर-जोर से चोदने लगा। एक हाथ से उसके स्तन दबा रहा था, दूसरे से उसकी चूत रगड़ रहा था। “ले देवी, मेरा लंड ले! आज से तू मेरी रंडी है!”
आधा घंटा चोदने के बाद मैंने कहा, “अब मुँह में निकालूँ?” देवी ने कहा, “नहीं, चूत में ही निकाल, मुझे गर्भवती कर दे!”
मैंने अंतिम झटके मारे और उसकी चूत में झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। वो काँप रही थी।
हम दोनों थककर गिर पड़े। देवी ने कहा, “विक्रम, अब हर हफ्ते भजन के बाद यहाँ आऊँगी। मेरी चूत को अपना लंड चाहिए।”
उस रात के बाद देवी नियमित आने लगी। कभी शॉप में, कभी उसके घर में जब पति बाहर होता। भजन गाती, फिर मेरे लंड पर बैठ जाती। उसकी चूत, गाँड, मुँह सब मेरे हो गए।
दोस्तों, देवी आज भी भजन गाती है लेकिन जब मैं उसके मुँह में लंड डालता हूँ तो वो चीखती है, “देवी देवी भजन सुनाओ… और जोर से चोदो!”
ये मेरी सच्ची कहानी है। अगर आपको और डिटेल चाहिए तो बताना।