नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। मैं दिल्ली के मयूर विहार में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूँ। उम्र मेरी २४ साल है और मैं एक छोटी सी आईटी कंपनी में जॉब करता हूँ। मेरे घर के बगल में ममथा आंटी रहती हैं। वो करीब ३८-३९ साल की हैं, शादीशुदा लेकिन पति ज्यादातर बाहर रहते हैं। ममथा आंटी का फिगर देखकर कोई भी आदमी पागल हो जाए। उनके बड़े-बड़े स्तन, मोटी गोल गाँड़ और चिकनी गोरी जांघें… हर बार जब वो सीढ़ियों से उतरतीं तो उनका चोला हिलता और मेरी लंड में जान आ जाती।
एक दिन शाम को बारिश हो रही थी। मैं स्कूटर से घर आ रहा था जब ममथा आंटी ने मुझे बुलाया। "रोहन बेटा, आ जाओ ना, चाय पी लो।" मैं अंदर गया। उनका फ्लैट खाली था। हम दोनों अकेले थे। बातें करते-करते वो मेरे पास बैठ गईं। उनकी साड़ी की पल्लू सरक गई और वो बड़े-बड़े स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने देख लिया। ममथा आंटी ने मुस्कुरा कर कहा, "क्या देख रहे हो रोहन? पसंद आया?"
मैं घबरा गया लेकिन वो आगे बढ़ गईं। "मुझे पता है तुम मुझे घूरते हो। कल रात को भी खिड़की से देख रहे थे ना?" फिर उन्होंने मुझे बताया कि उनके पति के साथ सेक्स बिल्कुल नहीं होता। वो अकेली रातें काटती हैं। बातों-बातों में उन्होंने कहा, "चलो एक वीडियो बना लेते हैं। तुम मेरी ममथा आंटी वीडियो बना लो।" मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
मैंने फोन निकाला और रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। ममथा आंटी ने साड़ी उतार दी। अंदर सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट था। ब्लाउज के अंदर से उनके काले निप्पल साफ दिख रहे थे। उन्होंने ब्लाउज खोल दिया। दो मोटे, भारी स्तन बाहर निकल आए। गोरे, नरम और निप्पल सख्त। मैंने हाथ बढ़ाया और एक स्तन दबाया। "आह्ह… रोहन, जोर से दबा… ममथा आंटी की चूचियाँ चूस ले।"
मैं उनके स्तन चूसने लगा। जीभ से निप्पल घुमाया, काटा। ममथा आंटी चीख रही थीं, "हाँ बेटा, चूस… तेरी आंटी की चूत गीली हो रही है।" फिर उन्होंने मेरी पैंट खोली। मेरा ७ इंच का लंड बाहर आ गया। "अरे वाह, कितना मोटा लंड है तेरा!" उन्होंने उसे मुंह में लिया। चूसने लगीं। "चल… ममथा आंटी का मुँह चोद… गला तक डाल दे।"
मैंने उनके बाल पकड़े और लंड उनके गले में घुसाया। थूक की आवाजें आ रही थीं। "ग्लुक… ग्लुक…" ममथा आंटी की आँखें पानी से भर गईं लेकिन वो रुक नहीं रही थीं। फिर उन्होंने मुझे लेटा दिया और अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी। "चाट… आंटी की चूत चाट ले।" उनकी चूत पूरी तरह गीली थी, बाल कटे हुए, होंठ मोटे और अंदर से गुलाबी। मैंने जीभ डाली और चाटने लगा। "आह्ह्ह… हाँ… जीभ अंदर डाल… ममथा आंटी की चूत का रस पी ले।"
उनका रस मेरे मुंह में भर रहा था। फिर ममथा आंटी ने उल्टा होकर ६९ पोजीशन में लंड चूसना शुरू किया। हम दोनों एक-दूसरे को चाट रहे थे। मैंने उनकी गाँड़ के छेद पर उंगली डाली। "नहीं बेटा… गाँड़ बाद में… पहले चूत फाड़ दे।"
मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया। लंड उनकी चूत पर रखा और जोर से धक्का मारा। "आह्ह्ह… माँ… कितना मोटा… फाड़ दी मेरी चूत!" ममथा आंटी चीख पड़ीं। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। "ले… ले ममथा आंटी… तेरी चूत मेरा लंड निगल रही है।" उनकी चूत से "पचक… पचक…" की आवाजें आ रही थीं। स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे।
मैंने उन्हें कुत्ते वाली पोजीशन में किया। गाँड़ ऊपर करके लंड पीछे से घुसाया। "हाँ… गाँड़ मार… ममथा आंटी की गाँड़ फाड़ दे।" मैंने उनकी गाँड़ थपथपाई। लाल निशान पड़ गए। फिर लंड निकालकर गाँड़ में डाला। "आह्ह… धीरे… गाँड़ फट जाएगी!" लेकिन मैंने जोर से धक्के मारे। "ले… तेरी गाँड़ अब मेरी है।"
वीडियो में सब कुछ रिकॉर्ड हो रहा था। ममथा आंटी बार-बार चीख रही थीं, "चोद… जोर से चोद… ममथा आंटी तेरा लंड नहीं छोड़ेगी।" मैंने उन्हें खड़ा करके दीवार से टिका कर चोदा। फिर बेड पर लिटाकर पैर उनके कंधों पर रखे और गहराई तक लंड घुसाया।
आखिर में ममथा आंटी ने कहा, "मुँह में डाल… रस निकाल दे।" मैंने उनके मुंह में लंड डाला और गरम-गरम वीर्य निकाल दिया। उन्होंने सब पी लिया। "अच्छा स्वाद है तेरे लंड का।"
हम दोनों थक गए। वीडियो बंद किया। लेकिन ममथा आंटी ने कहा, "ये वीडियो सिर्फ हम दोनों के लिए…

और जब मन करे फिर बनाएंगे।"
उस रात के बाद से हर हफ्ते हम नई-नई पोजीशन में वीडियो बनाते। कभी बालकनी में, कभी किचन में। ममथा आंटी की चूत अब मेरे लंड की गुलाम हो गई है। और हर बार वो कहतीं, "रोहन… ममथा आंटी वीडियो फिर बना लेते हैं।"
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती… हर रात नई चुदाई, नया मजा।)