नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और फ्रीलांस कंटेंट क्रिएटर हूँ। पिछले साल मुझे एक छोटी वेब सीरीज का मौका मिला जिसका टाइटल था “Village Romance”। सीरीज गांव की रोमांटिक कहानी पर बनी थी लेकिन असल में शूटिंग के दौरान जो कुछ हुआ वो कागज पर लिखी स्क्रिप्ट से कहीं ज्यादा गंदा और गरम था। हम लोग उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में गए थे जहां बिजली आती-जाती रहती थी, खेतों में हवा चलती थी और लड़कियां अभी भी पारंपरिक साड़ी में घूमती थीं।
मैं डायरेक्टर के साथ असिस्टेंट की तरह काम कर रहा था। सीरीज की हीरोइन का नाम था रिया, लेकिन गांव में हम सब उसे राधा कहते थे क्योंकि उसका रोल एक देहाती लड़की का था। राधा उम्र में पच्चीस साल की थी, गोरी नहीं लेकिन गेहूं जैसी रंगत, मोटे-मोटे स्तन जो साड़ी के ब्लाउज में अटककर बाहर आने को बेताब रहते, और चौड़ी कमर के नीचे मोटी-मोटी जांघें। जब वो खेतों में चलती तो उसकी गोल-गोल गांड साड़ी में लहराती थी जैसे कोई आम के पके फल को निचोड़ रहा हो।
शूटिंग के पहले दिन रात को बारिश शुरू हो गई। हम सब एक पुराने हवेली जैसे मकान में रुके थे। राधा मेरे कमरे के बगल वाले कमरे में थी। बारिश की आवाज में मैं सो नहीं पा रहा था। अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई। राधा खड़ी थी, भीगी हुई साड़ी उसके शरीर से चिपक गई थी। ब्लाउज के अंदर उसके काले निप्पल साफ दिख रहे थे और साड़ी की निचली हिस्सा इतनी भीग चुकी थी कि उसकी जांघों के बीच की फटी हुई चूत की हल्की-हल्की लकीर नजर आ रही थी।
“अर्जुन भाई, बिजली चली गई है, डर लग रहा है,” उसने कहा। मैंने उसे अंदर बुलाया। जैसे ही वो अंदर आई, मैंने दरवाजा बंद किया। बारिश की आवाज में मैंने उसके गीले बालों को हाथ से छुआ। वो मुस्कुराई। “ये सीरीज में तो सिर्फ रोमांस है, असल जिंदगी में कुछ और भी होता है ना?” मैंने पूछा। उसने सिर हिलाया।
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। साड़ी गिर गई। अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसके स्तन ब्लाउज से फटते हुए लग रहे थे। मैंने ब्लाउज के हुक खोले। दो बड़े-बड़े, भारी स्तन बाहर निकल आए, निप्पल कड़े हो चुके थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। राधा की सांस तेज हो गई। “अर्जुन… चूसो जोर से… मेरे स्तन दर्द कर रहे हैं…”
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। पेटीकोट का नाड़ा खोला। नीचे उसकी चूत पूरी तरह गीली थी। बाल कटे हुए नहीं थे, हल्के-हल्के बाल थे जो बारिश के पानी से चिपके हुए थे। मैंने उंगली डाली। चूत गर्म और टाइट थी। “कितनी टाइट चूत है तेरी… गांव वाली चूत सच में अलग होती है,” मैं बोला। राधा हंसी, “चोदो मुझे… लंड डालो अंदर… मैंने महीनों से नहीं चुदवाया।”
मैंने अपना लंड निकाला। सात इंच का मोटा लंड खड़ा हो चुका था, नसें उभरी हुई। राधा ने उसे हाथ में लिया और चाटने लगी। “कितना बड़ा है… गांव के लड़कों का छोटा होता है।” उसने पूरा मुंह में लिया, जीभ से निचले हिस्से को चाटा। थूक की आवाजें आने लगीं। मैंने उसके सिर को पकड़कर जोर-जोर से मुंह चोदना शुरू किया। “ले… गांड वाली राधा… पूरा लंड गले तक ले…”
फिर मैंने उसे उल्टा कर दिया। गांड ऊपर करके। उसकी फटी हुई गांड के छेद को देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने लंड उसकी चूत में घुसा दिया। “आह्ह्ह… धीरे… फट जाएगी…” राधा चीखी लेकिन मैंने जोर से धक्का मारा। पूरी लंबाई अंदर चली गई। चूत का रस बाहर निकलने लगा, मेरे अंडकोष तक बह रहा था। मैंने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से चोदना शुरू किया। थप-थप की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। “चोद… मुझे चोद… तेरी वेब सीरीज वाली हीरोइन आज तेरी रंडी बन गई…”
हमने घंटों चोदा। पहले मिशनरी पोजीशन में, फिर डॉगी स्टाइल में जहां मैं उसकी गांड थपथपा-थपथपा के चोद रहा था। उसके स्तन लटक रहे थे, मैं उन्हें निचोड़ता जा रहा था। “दूध निकाल… मेरे स्तनों से दूध निकाल…” वो बोल रही थी। फिर वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी। रस की आवाजें “चप-चप” कर रही थीं।
बारिश रुकने तक हम तीन बार झड़ चुके थे। पहली बार मैंने उसकी चूत में ही झड़कर गरम-गरम वीर्य भर दिया। दूसरी बार उसने मेरे लंड को मुंह में लेकर सब पी लिया। तीसरी बार हमने साइड में लेटकर धीरे-धीरे चोदा, जहां मैं उसकी गांड की दरार में उंगली डालकर चोद रहा था।
अगले दिन शूटिंग के दौरान हमारी नजरें मिलती रहती थीं। रात को फिर वही दोहराया। इस बार उसने मुझे अपनी गांड भी दी। “गांड़ मारो… गांव वाली लड़कियां गांड़ भी देती हैं…” लंड उसकी गांड़ में घुसा तो वो जोर से चीखी लेकिन फिर मजे से लेने लगी। “और जोर से… फाड़ दो मेरी गांड़…”
पूरा हफ्ता ऐसा ही चला। हमने खेतों में, हवेली की छत पर, नहर के किनारे चोदा। एक बार तो दिन में ही, जब सब दोपहर में सो रहे थे, हमने खलिहान में चोदा। राधा ने साड़ी ऊपर उठाई, मैंने पीछे से लंड डाला और वो “आह्ह…

उफ्फ… चोदो” बोलती रही।
सीरीज पूरी होने के बाद राधा दिल्ली आ गई। अब भी कभी-कभी वो आती है और हम पुरानी यादें ताजा करते हैं। वेब सीरीज तो फ्लॉप हो गई लेकिन हमारी गांव वाली चुदाई की कहानी आज भी मेरे दिमाग में ताजा है।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। हर बार नई पोजीशन, नया मजा। राधा की चूत अब भी मेरे लंड की भूखी रहती है।)