नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नैतिक है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और ये मेरी अपनी ज़िंदगी की वो रात है जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। अक्षरा मेरी बीवी है, बेहद खूबसूरत, गोल-गोल स्तन, मोटी गांड और वो चूत जो हमेशा गीली रहती है मेरे लिए। हमारे बेटे नक्ष की उम्र अभी छोटी है, तीन साल का। रोज़ की तरह उस रात भी हमने नक्ष को सुलाने का प्लान बनाया। फ्लैट में अंधेरा था, सिर्फ़ बेडरूम की हल्की लाइट जल रही थी। अक्षरा ने नक्ष को गोद में लिया, उसका सर अपने बड़े स्तनों पर रखा और लोरी गाने लगी। नक्ष की छोटी-छोटी साँसें धीमी पड़ रही थीं। अक्षरा की आँखें मेरी तरफ़ उठीं, उसकी जुबान बाहर निकली और उसने मुझे इशारा किया कि जल्दी करो, नक्ष सो जाए।
मैं बेड के पास खड़ा था, मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था अक्षरा की मोटी गांड देखकर। वो नक्ष को सहला रही थी, उसके हाथ उसके स्तनों पर फिसल रहे थे। आखिरकार नक्ष की साँसें नियमित हो गईं, वो गहरी नींद में चला गया। अक्षरा ने धीरे से उसे पालने में लिटाया, उसकी छोटी चादर ओढ़ा दी और फिर मेरी तरफ़ मुड़ी। उसकी आँखों में वो भूख थी जो सिर्फ़ मेरे लंड से मिट सकती थी।
“नैतिक, नक्ष सो गया है… अब जल्दी से मुझे चोदो,” अक्षरा ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में गंदी भूख थी। मैंने उसे खींचा और उसके होंठों पर अपना मुँह मार दिया। हम दोनों की जुबानें एक-दूसरे में उलझ गईं। अक्षरा ने मेरी कमर पकड़ ली और अपना शरीर मेरे से सटा लिया। उसके बड़े स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले, अंदर से उसकी काली ब्रा निकली। स्तन बाहर निकल आए, निप्पल्स सख्त और गुलाबी। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा, जीभ से निप्पल को घुमाया। अक्षरा सिसकारियाँ लेने लगी, “आह्ह… नैतिक, और जोर से चूस… मेरी चूत गीली हो रही है।”
मैंने दूसरा स्तन भी चूसा, दाँतों से हल्का काटा। अक्षरा की साँस तेज़ हो गई। मैंने उसके साड़ी के पल्लू को खींचा, पेटीकोट का नाड़ा खोला। साड़ी गिर गई, अक्षरा सिर्फ़ ब्लाउज और पैंटी में खड़ी थी। उसकी मोटी जांघें, गोल-गोल गांड और बीच में चूत का उभार साफ़ दिख रहा था। मैंने उसे बेड पर लिटाया, उसके पैर फैलाए और पैंटी उतार दी। चूत सामने थी, बालों वाली, होंठ फूले हुए और बीच से चमकता हुआ रस निकल रहा था। मैंने उंगली डाली, अंदर गर्म और गीला। अक्षरा चीख पड़ी, “हाँ… उंगली और डालो, मेरी चूत फाड़ दो।”
मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालीं और तेज़ी से आंदोलन करने लगा। अक्षरा की गांड उछल रही थी। रस बह रहा था, मेरी उंगलियाँ गीली हो गईं। फिर मैंने अपना मुँह चूत पर रखा, जीभ से चाटने लगा। अक्षरा का स्वाद नमकीन और मीठा था। मैंने उसकी चूत के होंठ चूसे, क्लिटोरिस को काटा। अक्षरा चीख रही थी, “ओह्ह नैतिक…

तेरी जीभ से मेरी चूत जल रही है… और चाट… मुझे चोदने लायक बना दे।” मैंने उसकी गांड भी चाटी, जीभ से गोल-गोल घुमाया। अक्षरा का शरीर काँप रहा था।
फिर मैंने अपना लंड निकाला। वो मोटा, नसों से भरा और सिरा लाल हो चुका था। अक्षरा ने हाथ में लिया, मसलने लगी और बोली, “कितना बड़ा लंड है तेरा… मेरी चूत में डाल, फाड़ दे इसे।” मैंने उसके मुँह में डाला, वो चूसने लगी। उसकी जुबान लंड पर घूम रही थी, गले तक ले जा रही थी। लार निकल रही थी, मेरे अंडकोष गीले हो रहे थे। मैंने उसके बाल पकड़े और मुंह चोदने लगा। अक्षरा का मुँह भर गया, वो गले से आवाजें निकाल रही थी।
फिर मैंने उसे उल्टा किया, गांड ऊपर करके। लंड चूत के पास रखा और एक जोरदार झटके से अंदर घुसा दिया। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… पूरा लंड डाल… मेरी चूत फट रही है।” मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। लंड अंदर-बाहर हो रहा था, रस छिटक रहा था। अक्षरा की गांड थप्पड़ खा रही थी, लाल हो रही थी। मैंने उसके बाल खींचे, “ले… मेरी रंडी… तेरी चूत मेरा लंड चाहती है।” अक्षरा चिल्ला रही थी, “हाँ… और जोर से… नक्ष सोया है… पूरा घर हिला दे।”
हमने पोजीशन बदली। अक्षरा ऊपर आई, मेरे लंड पर बैठ गई। वो ऊपर-नीचे होने लगी, उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथ में लिया, दबाया। अक्षरा का रस मेरे लंड पर बह रहा था। वो घुमावदार हरकतें कर रही थी, लंड उसकी चूत की दीवारों से रगड़ खा रहा था। “नैतिक… मैं झड़ने वाली हूँ… तेरे लंड पर अपना रस छोड़ दूँगी।” मैंने उसकी कमर पकड़ी और ऊपर से धक्के मारे। अक्षरा का शरीर काँप गया, वो झड़ गई, गरम रस निकला और मेरे लंड को भीगो दिया।
मैंने उसे नीचे लिटाया, पैर कंधों पर रखे और फिर से चोदने लगा। लंड गहराई तक जा रहा था। अक्षरा के स्तन लाल हो गए थे मेरे काटने से। मैंने उसकी गांड में उंगली डाली, दो जगहों से चोद रहा था। अक्षरा पागल हो रही थी, “दोनों छेद भर दो… मैं तेरी गुलाम हूँ।” हम घंटों चोदते रहे। पसीना, रस, लार सब मिल गया। आखिर में मैंने अक्षरा की चूत में झड़ने का फैसला किया। लंड अंदर गहराई तक डाला और गरम वीर्य निकाल दिया। अक्षरा का शरीर फिर काँपा, वो भी झड़ गई।
हम दोनों थककर लेट गए। नक्ष अभी भी सोया था। अक्षरा ने मुझे चूमा, “ये रात याद रहेगी।” मैंने फिर से उसके स्तन चूसे, तैयार हो रहा था दूसरी राउंड के लिए। पूरी रात हम चोदते रहे, नक्ष की नींद का फायदा उठाते हुए। अक्षरा की चूत लाल हो गई थी, मेरी गांड भी थप्पड़ों से गर्म। ये थी हमारी वो गंदी, मस्त रात।